सेम

Phaseolus vulgaris


पानी देना
मध्यम

जुताई
प्रत्यक्ष बीजारोपण

कटाई
40 - 60 दिन

श्रम
निम्न

सूरज की रोशनी
पूर्ण सूर्य

pH मान
5.5 - 6

तापमान
18°C - 29°C

उर्वरण
निम्न


सेम

परिचय

सेम (सेम की फली, हरी फली) भारत में सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से उगाई जाने वाली सब्जियों में से एक है। हरी कच्ची फलियों को सब्जी के रूप में पकाया और खाया जा सकता है। कच्ची फलियाँ ताजी, फ्रीज की हुईं या डिब्बाबंद बेची जाती हैं। यह चना और मटर की तुलना में उच्च पैदावार क्षमता वाली एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है।

सलाहकार

उपयोगी सुझावों को ब्राउज़ करने के लिए अपने विकास चरण का चयन करें!

अपने सीजन की तैयारी

बीज के रासायनिक उपचार
बीन्स की खेतबाड़ी के लिए परिस्थितियां

देखभाल

देखभाल

सेम 3-4 दिनों के अंदर अंकुरित हो जाती है। यह 45 दिनों के बाद फूल देना शुरू करती है। निराई बुवाई के 20-25 दिन और 40-45 दिन बाद करनी चाहिए। प्रत्येक निराई के बाद फसल पर मिट्टी चढ़ाई जानी चाहिए। लंबी सेम वाली क़िस्में बाँस के बने ढाँचे या लकड़ी के खंबों से बंधी रस्सियों के सहारे अच्छे से उगती हैं।

मिट्टी

एक अच्छी क्यारी में भुरभुरी लेकिन पर्याप्त नमी और खरपतवारों और पौधों के मलबे से मुक्त सघन मिट्टी होती है। अम्लीय मिट्टी को बुवाई से पहले चूने से उपचारित किया जाना चाहिए। खेत को तैयार करने के लिए, मिट्टी को 2-3 बार पॉवर टिलर या फावड़े से जोता जाना चाहिए। बुवाई के लिए क्यारियों को भुरभुरी बनाने के लिए आखिरी जुताई के दौरान पटरा चलाया जाना चाहिए।

जलवायु

इस फसल की उचित वृद्धि के लिए आदर्श तापमान सीमा 10-27°C है। 30 °C के ऊपर, फूल गिर जाने की गंभीर समस्या होती है, और 5 °C के नीचे उगने वाली फलियों और शाखाओं को नुकसान पहुँच सकता है।

संभावित बीमारियां

उस अवधि के दौरान आपकी फसल को खतरा पैदा करने वाली बीमारियों को देखने के लिए किसी एक विकास चरण का चयन करें।

सेम

सेम

इसके विकास से जुड़ी सभी बाते प्लांटिक्स द्वारा जानें!

अभी डाउनलोड करें

सेम

Phaseolus vulgaris

सेम

प्लांटिक्स एप के साथ स्वस्थ फसलें उगाएं और अधिक उपज प्राप्त करें!

अभी प्लांटिक्स का उपयोग करें!

परिचय

सेम (सेम की फली, हरी फली) भारत में सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से उगाई जाने वाली सब्जियों में से एक है। हरी कच्ची फलियों को सब्जी के रूप में पकाया और खाया जा सकता है। कच्ची फलियाँ ताजी, फ्रीज की हुईं या डिब्बाबंद बेची जाती हैं। यह चना और मटर की तुलना में उच्च पैदावार क्षमता वाली एक महत्वपूर्ण दलहनी फसल है।

मुख्य तथ्य

पानी देना
मध्यम

जुताई
प्रत्यक्ष बीजारोपण

कटाई
40 - 60 दिन

श्रम
निम्न

सूरज की रोशनी
पूर्ण सूर्य

pH मान
5.5 - 6

तापमान
18°C - 29°C

उर्वरण
निम्न

सेम

सेम

इसके विकास से जुड़ी सभी बाते प्लांटिक्स द्वारा जानें!

अभी डाउनलोड करें

सलाहकार

उपयोगी सुझावों को ब्राउज़ करने के लिए अपने विकास चरण का चयन करें!

अपने सीजन की तैयारी

बीज के रासायनिक उपचार
बीन्स की खेतबाड़ी के लिए परिस्थितियां

देखभाल

देखभाल

सेम 3-4 दिनों के अंदर अंकुरित हो जाती है। यह 45 दिनों के बाद फूल देना शुरू करती है। निराई बुवाई के 20-25 दिन और 40-45 दिन बाद करनी चाहिए। प्रत्येक निराई के बाद फसल पर मिट्टी चढ़ाई जानी चाहिए। लंबी सेम वाली क़िस्में बाँस के बने ढाँचे या लकड़ी के खंबों से बंधी रस्सियों के सहारे अच्छे से उगती हैं।

मिट्टी

एक अच्छी क्यारी में भुरभुरी लेकिन पर्याप्त नमी और खरपतवारों और पौधों के मलबे से मुक्त सघन मिट्टी होती है। अम्लीय मिट्टी को बुवाई से पहले चूने से उपचारित किया जाना चाहिए। खेत को तैयार करने के लिए, मिट्टी को 2-3 बार पॉवर टिलर या फावड़े से जोता जाना चाहिए। बुवाई के लिए क्यारियों को भुरभुरी बनाने के लिए आखिरी जुताई के दौरान पटरा चलाया जाना चाहिए।

जलवायु

इस फसल की उचित वृद्धि के लिए आदर्श तापमान सीमा 10-27°C है। 30 °C के ऊपर, फूल गिर जाने की गंभीर समस्या होती है, और 5 °C के नीचे उगने वाली फलियों और शाखाओं को नुकसान पहुँच सकता है।

संभावित बीमारियां

उस अवधि के दौरान आपकी फसल को खतरा पैदा करने वाली बीमारियों को देखने के लिए किसी एक विकास चरण का चयन करें।