- मक्का

मक्का मक्का

मकई का आम ज़ंग (पुचिनिया सोर्घी कवक)

फफूंद

Puccinia sorghi


संक्षेप में

  • पत्तियों पर छोटे-छोटे धब्बे धीरे-धीरे पीले-भूरे रंग के थोड़े उभरे हुए धब्बों में विकसित हो जाते हैं.
  • ये धब्बे बाद में पत्तियों के ऊपरी और निचले हिस्सों में सुनहरे-भूरे रंग के पस से भरे दानों में बदल जाते हैं.
  • लक्षण आमतौर पर पौधे के अन्य भागों पर मौजूद नहीं होते हैं.
  • डंठल कमज़ोर और नरम हो जाती हैं और उनके झुकने की संभावना बढ़ जाती है।.
 - मक्का

मक्का मक्का

लक्षण

पत्तियों के दोनों किनारों पर छोटे-छोटे धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे छोटे, पीले-भूरे रंग के, थोड़े उठे हुए स्थानों में विकसित हो जाते हैं। ये मुख्य रूप से गोलाकार धब्बे बाद में पाउडर जैसे सुनहरे-भूरे रंग के पस से भरे दानों में परिवर्तित हो जाते हैं जो पत्तियों के ऊपरी और निचले हिस्सों पर बिखरे होते हैं। पौधे जैसे-जैस परिपक्व होते हैं, इन धब्बों का रंग काला पड़ सकता है। ज़ंग के अन्य रोगों के विपरीत, लक्षण आमतौर पर पौधों के अन्य हिस्सों पर, जैसे डंठल, पत्तियों का आवरण या भूसी, मौजूद नहीं होते हैं। लेकिन, डंठल कमज़ोर और नरम हो जाती हैं और उनके झुकने की संभावना बढ़ जाती है। छोटी पत्तियों के ऊतक परिपक्व पत्तियों की तुलना में कवक संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हैं। प्रारंभिक अवस्था के दौरान संक्रमित पौधे पत्तियों की हरित हीनता और मृत्यु दिखा सकते हैं, जिससे ऊपरी पत्तियां प्रभावित होती हैं और उपज हानि बढ़ सकती है।

मोबाइल फसल चिकित्सक की सहायता से अपनी उपज बढ़ाएं!

इसे अभी निशुल्क प्राप्त करें!

प्रभावित फसलें

ट्रिगर

रोग पुचिनिया सोर्घी कवक के कारण होता है। यह कवक सर्दियों में एक अन्य मेज़बान में जीवित रहता है (ऑक्सेलिस की एक प्रजाति) और वसंत के दौरान इसके बीजाणु छोड़े जाते हैं। बीजाणु, हवा और बारिश के माध्यम से अधिक दूरी तक फैल सकते हैं। पत्तियों पर उतरने के बाद वे संक्रमण की प्रक्रिया शुरू करते हैं। हवा और बारिश के कारण एक पौधे से दूसरे पौधे का गौण संक्रमण भी हो सकता है। बीमारी के विकास को उच्च आद्रता (लगभग 100%), ओस, बारिश तथा 15 और 20 डिग्री सेल्सियस के ठंडे तापमान (क्षेत्र के आधार पर भिन्न हो सकता है) से मदद मिलती है। इसके विपरीत, गर्म, शुष्क मौसम कवक के विकास और रोग की संभावना को धीमा कर देता है या उसमें बाधा डालता है। यह बीज उत्पादन और मीठी मकई के लिए इस्तेमाल पौधों में एक आम समस्या है। औद्योगिक उत्पादों, पशुओं के भोजन के लिए, या प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ बनाने के लिए उगाए जाने वाले पौधों पर इसका असर नहीं पड़ता है। पौधे की कम उत्पादकता और डंठलों के झुकने के कारण उपज कम हो जाती है।

जैविक नियंत्रण

पुचिनिया सोर्घी के खिलाफ़ कोई अन्य उपचार अब तक उपलब्ध नहीं है। यदि आप किसी ऐसे उपचार के बारे में जानते हैं जिसकी मदद से इस रोग से लड़ा जा सकता है, तो हमसे संपर्क करें। हमें आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो जैविक उपचार के साथ निवारक उपायों के एकीकृत दृष्टिकोण पर हमेशा विचार करें। संवेदनशील किस्मों पर कवकनाशकों का उपयोग फ़ायदेमंद हो सकता है। यदि मौसम की स्थिति के कारण ज़ंग की तेज़ी से फैलने की संभावना है, तो मौसम के शुरूआत में पत्तियों पर कवकनाशक लगाएं। ज़ंग नियंत्रण के लिए कई कवकनाशक उपलब्ध हैं। मेंकोज़ेब, पायराक्लोस्ट्रोबिन, पायराक्लोस्ट्रोबिन के साथ मेटकोनाज़ोल, पायराक्लोस्ट्रोबिन के साथ फ़्लुक्सापायरोक्साड, अज़ोक्सीस्ट्रोबिन के साथ प्रोपिकोनाज़ोल, ट्राईफ़्लोक्सीस्ट्रोबिन के साथ प्रोथियोकोनाज़ोल वाले उत्पादों का उपयोग रोग को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। उपचार का उदाहरण यह रहा: दानों के दिखाई देते ही मेंकोज़ेब का 2.5 ग्राम/लीटर के हिसाब से छिड़काव करें और फिर फूल निकलने तक 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।

निवारक उपाय

  • बाज़ार में उपलब्ध प्रतिरोधी किस्में लगाएं.
  • संतुलित उर्वरिकरण सुनिश्चित करें.
  • संक्रमण के लिए अनुकूलतम स्थिति से बचने के लिए जल्दी रोपण करें.
  • जल्दी परिपक्व होने वाली किस्मों का उपयोग करें.
  • गैर-धारक फसलों के साथ फ़सल चक्रीकरण करें।.

मोबाइल फसल चिकित्सक की सहायता से अपनी उपज बढ़ाएं!

इसे अभी निशुल्क प्राप्त करें!