- गेहूं

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फ्यूज़ेरियम शीर्ष झुलसा

फफूंद

Fusarium graminearum


संक्षेप में

  • रोग के दो विशिष्ट प्रकार के लक्षण होते हैं: अंकुरों का झुलसा तथा शीर्ष का झुलसा.
  • तने के आधार पर हल्के कत्थई, पानी से भीगे हुए दाग़, छोटे पौधों की सड़न तथा झुलसा पहले प्रकार के लक्षणों के संकेत हैं.
  • पानी से भीगी हुई बालियाँ तथा उड़ा हुआ भूसे जैसा रंग शीर्ष झुलसा के दो विशिष्ट संकेत हैं.
  • गर्म, नम मौसम में प्रचुर मात्रा में कवकीय विकास के कारण ये गुलाबी से हल्के कत्थई रंग में बदल जाते हैं।.
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लक्षण

लक्षणों की तीव्रता फसल के प्रकार (प्रमुख मेज़बान गेंहूं, जौ तथा जई हैं), संक्रमण के समय तथा वातावरणीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। रोग के दो विशिष्ट प्रकार के लक्षण होते हैं: अंकुरों का झुलसा तथा शीर्ष झुलसा। पहले प्रकार में, तने के आधार पर हल्के कत्थई, पानी से भीगे दाग़ दिखाई देते हैं तथा अंकुर निकलते समय परिगलित हो जाते हैं। ऐसा संक्रमित बीजों को ठंडी नम मिट्टी में बोये जाने पर विशेष तौर पर दिखाई देता है। पौधे के विकास की बाद की अवस्थाओं में, सामान्यतः पौधे के शिखर तथा आधार की सड़न देखी जाती है। पानी से भीगी हुई बालियाँ तथा उड़ा हुआ भूसे जैसा रंग शीर्ष झुलसा के दो विशिष्ट संकेत हैं। गर्म, नम मौसम में प्रचुर मात्रा में कवकीय विकास के कारण ये गुलाबी से हल्के कत्थई रंग में बदल जाते हैं। दाने देखने में झुर्रीदार और खुरदुरे होते हैं। संक्रमण पूरी बाली प्रभावित होने तक प्रायः बालियों से बालियों में फैलता है। कुछ फसलों में, उपज हानि 70% तक आँकी गई है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

खाद्यान्नों के शीर्ष झुलसा के लक्षणों का कारण कवक फ्यूज़ेरियम ग्रैमिनेरम है, जो मौसमों के मध्य वैकल्पिक मेज़बानों या फसलों के अवशेषों तथा मिट्टी की जैविक सामग्री में जीवित रहता है। अनुकूल परिस्थितियों में यह बीजाणु बनाना शुरू कर देता है, जो हवा के झोकों से लंबी दूरी तक फैल जाते हैं। यह भी समझा जाता है कि इसका फैलाव कुछ प्रजातियों के कीटों के द्वारा भी होता है। खाद्यान्नों पर इस कवक के हमले की आशंका फूल आने की अवधि के आसपास सर्वाधिक होती है। पौधों के ऊतकों पर एक बार इसका अंकुरण होने पर यह प्राक्रतिक छिद्रों से क्युटिकल में प्रवेश कर जाता है। जैसे-जैसे यह संवहनी ऊतकों में वृद्धि करता है, यह बालियों में पानी तथा पोषक तत्वों की आपूर्ति बाधित करता है, जिसके कारण विशेष रूप से धूप से रंग उड़ने वाली बालियाँ तथा झुर्रीदार दाने दिखते हैं। साथ ही, विषाक्त पदार्थों के उत्पादन से अनाज की बाज़ार में बिकने की संभावना घट जाती है। कई वातावरणीय कारकों जैसे कि प्रकाश की तीव्रता, तापमान, नमी, वर्षण तथा पत्तियों का गीलापन इसका जीवन चक्र प्रभावित करते हैं। 20-32 डिग्री सेल्सियस तापमान तथा पत्तियों का लम्बी अवधि तक गीलापन इसके लिए अनुकूल है।

जैविक नियंत्रण

फ्यूज़ेरियम ग्रैमिनेरम के संक्रमण के प्रभावों को कम करने के लिए कई जैव-नियंत्रक कारकों का परीक्षण किया गया है। गेहूँ में जीवाणु सुडोमोनस फ्लोरेसेंस, बैसिलस मेगाथेरियम तथा बेसिलस सबटिलिस वाले उत्पादों का फूल आने के समय इस्तेमाल रोग के होने, इसकी तीव्रता तथा उपज हानि कम करता है। इनमें से अधिकाँश परीक्षण खेतों में नियंत्रित परिस्थितियों में किए गए हैं। प्रतिस्पर्धी कवक ट्राईकोडर्मा हरज़ियेनम तथा क्लोनोस्टेकिस रोज़िया के इस्तेमाल से भी कुछ सफलता मिली है। गेहूँ तथा जौ के बीजों के साथ-साथ अन्य बीजों से भी इस कवक से छुटकारा पाने का एक प्रभावी तरीका 70 डिग्री सेल्सियस पर 5 दिनों के लिए शुष्क ऊष्मा उपचार है।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा एक समेकित दृष्टिकोण से रोकथाम उपायों के साथ-साथ उपलब्ध जैविक उपचारों को अपनाएं। शीर्ष के फ्यूज़ेरियम झुलसा को नियंत्रित करने के लिए कवकनाशकों के इस्तेमाल का समय महत्वपूर्ण है। फूल खिलने के समय ट्राइज़ॉल परिवार के कवकनाशकों (मेटाकोनाज़ॉल, टेबूकोनाज़ॉल, प्रोथियोकोनाज़ॉल तथा थियाबेंडाज़ॉल) का पत्तियों पर छिड़काव इस रोग के होने तथा दाने में माइकोटॉक्सिन की मात्रा में महत्वपूर्ण कमी लाता है। ध्यान रखें कि इन उत्पादों के साथ फसल काटने की समय सीमाएं भी हैं।

निवारक उपाय

  • यदि उपलब्ध हों, तो प्रतिरोधी किस्मों का इस्तेमाल करें.
  • खुली धूप तथा हवा की अच्छी आवाजाही वाले स्थानों का चयन करें.
  • बुवाई के समय फसल के मध्य स्थान बढ़ाएं ताकि अच्छा वायु संचार बना रहे.
  • गैर-मेज़बान प्रजातियों के साथ फसल चक्रीकरण की योजना बनाएं.
  • नाइट्रोजन उर्वरक के अधिक मात्रा में इस्तेमाल से बचें.
  • जुताई न करना अच्छा रहेगा क्योंकि यह कवक के जीवन चक्र के लिए सहायक हो सकता है.
  • खेतों तथा उसके आस-पास से खर-पतवार तथा वैकल्पिक मेज़बान पौधे हटा दें.
  • फसल काटने के बाद पौधों के अवशेषों को हटा तथा दबा दें।.

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