- सोयाबीन

सोयाबीन सोयाबीन

सोयाबीन रस्ट

फफूंद

Phakopsora pachyrhizi


संक्षेप में

  • पत्तियों के नीचे की ओर तथा शिराओं के साथ छोटे, भूरे धब्बे.
  • भूरे धब्बे लाल से कत्थई में बदल जाते हैं.
  • धब्बों के ईर्दगिर्द का क्षेत्र पीला पड़ जाता है.
  • संक्रमण के अंतिम चरण में सभी पत्तियों में लक्षण दिखाई देने लगते हैं।.
 - सोयाबीन

सोयाबीन सोयाबीन

लक्षण

संक्रमण पौधों के निचले हिस्से से आरम्भ होता है और फिर ऊपर की और बढ़ता है। पहले लक्षण फूल खिलने की अवस्था में पत्तियों में नीचे की ओर तथा शिराओं के साथ छोटे भूरे धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। बाद में, ये धब्बे आकार और संख्या में बढ़ते हैं, आपस में जुड़ते हैं और लाल-कत्थई या लाल-काले हो जाते हैं, जो प्रायः पीले प्रभामंडल से घिरे होते हैं। अब ये पत्तियों के दोनों ओर और डंठलों पर भी उपस्थित होते हैं, और कभी-कभी तनों में भी दिखते हैं। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, वे उभरे हुए, हल्के कत्थई कीटाणुयुक्त छल्ले से ढक जाते हैं जो कि नग्न आँखों से भी दिखाई देते हैं।

मोबाइल फसल चिकित्सक की सहायता से अपनी उपज बढ़ाएं!

इसे अभी निशुल्क प्राप्त करें!

प्रभावित फसलें

ट्रिगर

सोयाबीन रस्ट एक आक्रामक रोग है जो फ़कोप्सोरा पेकिर्हिज़ी नाम के फफूंद से होता है। जब समीप में अन्य कोई सोयाबीन का पौधा न हो, तो इसे हल्की सर्दी और अन्य धारकों की आवश्यकता होती है क्योंकि यह हरे जीवित ऊतक के बिना जीवित और विकसित नहीं हो सकता। रस्ट के बीजाणु पौधों की कोशिकाओं को पत्तियों के ऊतकों को छिद्रों या घावों के बजाय सीधे ही छेद सकते हैं। 6 से 12 घन्टों तक पत्तियों का लगातार नम रहना, माध्यम तापमान (15 से 25 डिग्री से) तथा उच्च नमी (>75 %) इस रोग के विकास में सहायक हैं।

जैविक नियंत्रण

संक्रमण की गंभीरता को कम करने के लिए उन उत्पादों का प्रयोग करें, जिनमें कोरिम्बिया सिट्रिओडोरिया 1%, सिम्बोपोगोन नारडास 0.5% तथा थायमस वल्गेरिस 0.3% उपस्थित हों।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो जैविक उपचार के साथ निवारक उपायों के एकीकृत दृष्टिकोण पर हमेशा विचार करें।। सही फफूंदरोधक को चुनना और इसका सही समय पर प्रयोग करना महत्वपूर्ण है। हेक्साकोनोज़ोल तथा प्रोपिकोनाज़ोल पर आधारित फफूंदरोधक का प्रयोग करें। पौधे के विकास के पूरे समय के दौरान समय-समय पर ज़िंक आयरन-मनेब यौगिक का प्रयोग किया जाना चाहिए।

निवारक उपाय

  • सहनशील या प्रतिरोधक प्रजातियों को चुनें.
  • जल्दी रोपें और यदि संभव हो तो जल्द पकने वाली प्रजाति चुनें.
  • इसके अलावा, शुष्क समय का लाभ लेने के लिए देर से रोपें.
  • छतरियों के जल्द सूखने के लिए कतारों के बीच अधिक जगह का प्रयोग करें.
  • अपने पौधों की नियमित रूप से निगरानी करें और अन्य धारकों को निकालते रहें.
  • मिट्टी की उर्वरकता, विशेषकर पोटेशियम और फोस्फोरस के स्तर को बनाए रखें।.

मोबाइल फसल चिकित्सक की सहायता से अपनी उपज बढ़ाएं!

इसे अभी निशुल्क प्राप्त करें!