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फ़ेओस्फ़ेरिया लीफ़ स्पॉट

फफूंद

Phaeosphaeria maydis


संक्षेप में

  • पत्ते के ब्लेड पर पीले हरितहीन धब्बे बिखरे हुए नज़र आते हैं.
  • ये धब्बे प्रक्षालित और सूखे केंद्रों और गहरे भूरे अनियमित किनारों के साथ गोलाकार या लंबाकार घाव में विकसित होते हैं.
  • गंभीर मामलों में, वे जुड़कर पूरी पत्ती को ढक देते हैं.
  • फ़ेओस्फ़ेरिया लीफ़ स्पॉट को आमतौर पर मौसम में देरी से होने वाला एक मामूली रोग माना जाता है।.
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लक्षण

प्रारंभिक लक्षण पत्तियों के ब्लेड पर बिखरे हुए छोटे, फीके हरे से लेकर पीले हरितहीन धब्बे होते हैं। ये धब्बे बाद में बड़े होकर प्रक्षालित और सूखे केंद्रों और गहरे भूरे रंग के अनियमित किनारों के साथ गोलाकार या लंबाकार घावों (3 से 20 मिमी) में विकसित हो जाते हैं। गंभीर मामलों में, वे जुड़कर पूरी पत्ती को नुकसान पहुँचाते हैं। पत्तियों के निचले हिस्से के घावों के अंदर छोटे-छोटे काले रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। यदि संक्रमण पौधों के विकास के प्रारंभिक चरण के दौरान होता है और ऊपरी पत्तियों को फूल निकलने के दौरान हानि पहुँचती है, तो गंभीर उपज हानि हो सकती है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

यह रोग कवक फ़ेओस्फ़ेरिया मेडिस के कारण होता है, जो सर्दियों में फसल के मलबे में रहता है। अनुकूल परिस्थितियों के दौरान, इसके बीजाणु बारिश की बौछार और हवा के माध्यम से नए पौधों तक फैल जाते हैं। यह नए पत्तों पर बढ़ता है और संक्रमण के एक द्वितीयक चरण को आरंभ करने लगता है। अधिक वर्षा और अधिक सापेक्षिक आद्रता (70% से ऊपर), रात के अपेक्षाकृत कम तापमान (लगभग 15 डिग्री सेल्सियस) के साथ रोग की प्रगति को बढ़ावा देते हैं। ये स्थितियां अधिक ऊंचाईयों पर प्रचलित रहती हैं। केवल विशिष्ट मामलों में यह रोग पौधों की उत्पादकता और उपज को प्रभावित करता है। सामान्य तौर पर, यह मौसम में देरी से होने वाला एक मामूली महत्व का रोग माना जाता है।

जैविक नियंत्रण

क्षमा करें, आज तक हमें फ़ेओस्फ़ेरिया लीफ़ स्पॉट के लिए किसी भी जैविक उपचार के बारे में नहीं पता है। अगर आप किसी ऐसे उपचार के बारे में जानते हैं जो इस रोग से लड़ने में मदद करे, तो कृपया हमसे संपर्क करें। हमें आपके जवाब का इंतज़ार रहेगा।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो जैविक नियंत्रण उपायों के साथ रोकथाम उपायों के एकीकृत दृष्टिकोण पर हमेशा विचार करें। मेंकोज़ेब, पायराक्लोस्ट्रोबिन जैसे कवकनाशकों को पत्तियों पर छिड़क कर रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।

निवारक उपाय

  • यदि उपलब्ध हो, तो प्रतिरोधी किस्मों का उपयोग करें.
  • रोग के फैलने के लिए अनुकूल मौसम की स्थिति से बचने के लिए पहले या बाद में बुवाई करें.
  • कटाई के बाद गहरी जुताई करें और फसल के अवशेषों को दफ़ना दें।.

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