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बोट्रीटिस पत्तियों का पाला लगना

फफूंद

Botryotinia squamosa


संक्षेप में

  • पत्तियों पर, प्रायः हल्के हरे रंग के आभामंडल से घिरे हुए, छोटे, सफ़ेद और लम्बे से धब्बे दिखाई देते हैं | समय के साथ, ये धब्बे केंद्र में विशिष्ट लम्बे से चीरे के साथ धँसे हुए तथा भूसे जैसे रंग के हो जाते हैं | पत्तियों पर पाला लगने तथा मर जाने के कारण पौधे की मृत्यु भी हो सकती है | खेतों में मरते हुए पौधों के बड़े पीले हिस्से देखे जा सकते हैं |.
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लक्षण

संक्रमण विकास की किसी भी अवस्था में हो सकता है और आम तौर पर यह पहले पुरानी पत्तियों पर विकसित होता है | आरंभिक संक्रमण पत्तियों की ऊपरी सतह पर छोटे (1-5 मिमी), गोलाकार या लम्बाई लिए हुए सफ़ेद धब्बों के रूप में होता है | एकल धब्बे तथा बाद में धब्बों के समूह हल्के हरे या चाँदी जैसे रंग के आभामंडल से घिरे होते हैं जो आरम्भ में पानी से भरे हुए दिखते हैं | समय के साथ, घावों की संख्या बढती है और पुराने धब्बों के केंद्र दबे हुए और भूसे के रंग के हो जाते हैं जो कि बढ़ते परिगलन का संकेत है | बाद की अवस्थाओं में घाव में लम्बाई में विशिष्ट चीरा दिखाई दे सकता है | पत्तियों के शीर्ष तथा किनारे नर्म हो जाते हैं तथा धीरे-धीरे परिगलित हो जाते हैं जिसके कारण पाला लगना तथा मृत्यु होती है | अनुकूल परिस्थितियों में, रोग कंद को भी प्रभावित करता है जिसके कारण इसकी गुणवत्ता तथा आकार कम हो जाते हैं | जैसे-जैसे रोग और बढ़ता है, खेत में दूर से ही मरते हुए पौधों के बड़े पीले धब्बे देखे जा सकते हैं |

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

यह रोग कवक बोट्रीटिस स्क्वामोसा के कारण होता है, जो खेत में या भंडारण की सुविधाओं में बचे संक्रमित कंद या पौधों के अन्य अवशेषों पर जीवित रहता है | जब परिस्थितियाँ अनुकूल होतीं हैं, इन ऊतकों पर प्राथमिक कवकीय जीवाणु संक्रमण उत्पन्न होते है तथा हवा के द्वारा समीपवर्ती पौधों तक प्रसारित होते हैं | 10 से 20 डिग्री से. के मध्य का तापमान, अधिक वर्षा, पत्तियों के गीले रहने का अधिक समय या उच्च सापेक्षिक आर्द्रता कवक के जीवन-चक्र के अनुकूल होते हैं | लक्षणों का अन्य रोगों तथा विकृतियों के साथ संदेह होना समभाव है जैसे कि सूखे का तनाव, ओले से चोट, थ्रिप संक्रमण या तृणनाशकों से हानि |

जैविक नियंत्रण

इस समय इस रोग का सामना करने के लिए कोई भी जैविक उपचार उपलब्ध नहीं है | यदि आप कुछ जानते हैं तो हमसे संपर्क करें |

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा समवेत उपायों का प्रयोग करना चाहिए जिसमे रोकथाम के उपायों के साथ जैविक उपचार, यदि उपलब्ध हो, का उपयोग किया जाए | खेती बाड़ी कीअच्छी आदतें संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए आवश्यक हैं | यदि कवकरोधकों की आवश्यकता हो, तो आईप्रोडिन, पायरिमेथानिल, फ्लुआजिनाम या सिप्रोडिनिल वाले उत्पादों का फ्लुडीओक्सोनिल के साथ मिश्रण छिड़काव की तरह प्रयोग करने पर बहुत अच्छे नतीजे देते हैं | अन्य क्लोरोथैलोनिल तथा मेन्कोजेब पर आधारित उत्पाद भी काम देते हैं किन्तु कम प्रभावी होते हैं | कवकरोधकों का सतह से धूम्रिकरण हवा में छिड़काव करने की प्रक्रिया से अधिक प्रभावी हो सकता है |

निवारक उपाय

  • किसी प्रमाणित स्त्रोत से लिए गए स्वस्थ बीज या रोपाई के पदार्थों का प्रयोग करें | जल्द परिपक्व होने वाली प्रजातियों का चुनाव करें | हवा के अच्छे आवागमन के लिए कतार में रोपाई के लिए निर्देशित स्थान छोड़ने का पालन करें | प्याज के उत्पादन के स्थान के समीप बीजों के उत्पादन खेतों में रोपाई न करें | मिट्टी में अच्छी जलनिकासी की व्यवस्था करें तथा अत्यधिक सिंचाई न करें | मौसम के अंत में उर्वरकों का प्रयोग न करें जब शीर्ष सूख रहे हों | अपने पौधों तथा खेतों में रोग के चिन्हों के लिए नियमित निगरानी रखिये | खर-पतवार तथा स्वैच्छिक प्याज को खेतों में या उसके समीप से हटा दें | संक्रमित पौधों तथा पौधों के हिस्सों को हटा दें तथा जला कर नष्ट कर दें | फसल काटने के बाद ढेर को चुन कर हटा दें तथा प्याज के सिरों को काट दें और जला कर नष्ट कर दें | अन्य रोगों से संक्रमण के खतरे को बढ़ने से बचने के लिए 2 वर्षों के लिए फसल चक्रीकरण की सलाह दी जाती है | संक्रमित स्थान से अन्य खेतों तक कंद का परिवहन न करें |.

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