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टमाटर की पत्तियों पर फफूंदी (लीफ़ मोल्ड)

फफूंद

Mycovellosiella fulva


संक्षेप में

  • पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले हरे से लेकर पीले छितरे हुए धब्बे.
  • नीचे की तरफ़ जैतून हरे से ले कर धूसर बैंगनी चकत्ते.
  • पत्तियों का सूखना और अंदर की ओर मुड़ जाना।.
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लक्षण

लक्षण आम तौर पर पत्तियों के दोनों तरफ़ और कभी-कभी फलों पर पाए जाते हैं। पुरानी पत्तियां पहले संक्रमित होती हैं और फिर रोग धीरे-धीरे नई पत्तियों की ओर फैलता है। पत्ती की ऊपरी सतह पर अनिश्चित किनारों वाले छोटे, छितरे हुए पीले हरे या पीले धब्बे दिखते हैं। नीचे की तरफ़, पत्ती के धब्बों के नीचे जैतून हरे से लेकर धूसर बैंगनी और मख़मली चकत्ते बन जाते हैं। ये बीजाणु उत्पादन करने वाली संरचनाओं और बीजाणु समूहों (कोनिडिया) के बने होते हैं। समय के साथ जैसे-जैसे ये धब्बे बढ़ते हैं, संक्रमित पत्ती का रंग पीलेपन (हरिमाहीनता) से बदलकर भूरा (परिगलन) हो जाता है और पत्ती मुड़ना और सूखना शुरू हो जाती है। पत्तियां समय से पहले गिर जाती हैं जिससे विकट मामलों में विपत्रण हो जाता है। कलियां काली हो सकती हैं और फलों का गुच्छा बनने से पहले मर सकती हैं। हरे और पके हुए फलों में तने के कोने पर चिकने काले अनियमित क्षेत्र विकसित हो जाते हैं। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, संक्रमित हिस्सा धंसा हुआ, सूखा और चमड़े जैसा हो जाता है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

लक्षणों का कारण फफूंद माइकोवेलोसिएला फ़ल्वा है। इसके बीजाणु कमरे के तापमान पर बिना किसी धारक 6 महीने तक जीवित बने रहे सकते हैं। पत्ती पर लंबे समय तक नमी और 85% से अधिक आर्द्रता बीजाणुओं के पनपने को बढ़ावा देती है। बीजाणुओं के पनपने के लिए तापमान 4 से 34° सेल्सियस होना चाहिए। सर्वोत्तम तापमान 24 से 26° सेल्सियस है। सूखी परिस्थितियां और पत्तियों पर पानी की गैरमौजूदगी से बीजाणुओं का पनपना बाधित होता है। लक्षण आम तौर पर रोग संचार के 10 दिन बाद पत्ते के दोनों ओर धब्बों के रूप में दिखाई देने शुरू हो जाते हैं। नीचे की तरफ़ बड़ी संख्या में बीजाणु बनाने वाली संरचनाएं बनती हैं। ये बीजाणु हवा और बारिश की बौछारों से, यहां तक कि औज़ारों, श्रमिकों के कपड़ों, कीटों के माध्यम से आसानी से पौधे से पौधे तक फैलते हैं। रोगाणु आम तौर पर उच्च नमी स्तर पर रंध्रों से प्रवेश कर पत्तियों को संक्रमित करता है।

जैविक नियंत्रण

बीजों पर रोगाणुओं से बचाव के लिए गर्म पानी (122° फॉरेनहाइट या 50° सेल्सियस पर 25 मिनट) से बीज उपचार की सलाह दी जाती है। एक्रिमोनियम स्ट्रिक्टम, डाइसिमा पल्विनाटा, ट्राईकोडर्मा हर्ज़ियेनम या टी. विरिडी और ट्राइकोथेसियम रोज़ियम जैसे फफूंद एम. फ़ल्वा के विरोधी होते हैं और इसका फैलाव रोकने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। ग्रीनहाउस परीक्षणों में, टमाटरों पर एम. फ़ल्वा की वृद्धि को ए. स्ट्रिक्टम, टाईकोडर्मा विरिडी किस्म 3 और टी. रोज़ियम ने क्रमशः 53, 66 और 84% रोका है। छोटे खेतों में एप्पल-साइडर, लहसुन या दूध के छिड़काव और सिरका मिश्रण का इस्तेमाल फफूंद के लिए किया जा सकता है।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा एक समेकित दृष्टिकोण से रोकथाम उपायों के साथ उपलब्ध जैविक उपचारों का इस्तेमाल करें। बचाव उपायों का इस्तेमाल संक्रमण से पहले किया जाना चाहिए जब मौसम परिस्थितियां रोग के विकास के लिए अनुकूल होती हैं। खेत में इस्तेमाल करने के लिए क्लोरोथैलोनिल, मैनेब, मैंकोज़ेब और कॉपर फार्मूलेशन की सलाह दी जाती है। ग्रीनहाउस में डाइफ़ेनेकोनैज़ॉल, मैंडीप्रोपामिड, साइमॉक्सानिल, फ़ैमॉक्साडॉन और साइप्रोडिनिल के इस्तेमाल का सुझाव दिया जाता है।

निवारक उपाय

  • प्रमाणित, रोगरहित बीजों का इस्तेमाल करें.
  • यदि आपके क्षेत्र में उपलब्ध हों तो प्रतिरोधी या सहनशील प्रजातियों का उपयोग करें.
  • रोग की विकटता कम करने के लिए अगेती पौधरोपण करें.
  • वायु संचार बढ़ाने और छतरी (कैनोपी) में नमी कम करने के लिए पंक्ति और पौधों के बीच अंतराल समायोजित करें.
  • यदि आपके क्षेत्र में उपलब्ध हों तो प्रतिरोधी या प्रतिरोध क्षमता वाली किस्में लगाएं.
  • रोग की निगरानी करें और संक्रमित पौधों को पहचान कर तुरंत हटा दें.
  • अत्याधिक नाइट्रोजन उर्वरक के इस्तेमाल से बचें.
  • ग्रीनहाउस के भीतर वायु संचार बढ़ाएं.
  • सापेक्षिक आर्द्रता 85% के नीचे और रात का तापमान बाहरी तापमान से अधिक रखें (ग्रीनहाउस के लिए उपयुक्त).
  • टपक सिंचाई का इस्तेमाल करें और पत्तियों पर पानी डालने से बचें.
  • पौधे को सीधा रखने के लिए खूंटी, रस्सियों का इस्तेमाल या काट-छांट करें और इसके चारों तरफ़ वायु प्रवाह बढ़ाएं.
  • फसल कटाई के बाद पौधे के सारे अवशेषों को हटाकर जला दें.
  • फसलों के बीच ग्रीनहाउस को सैनिटाइज़ करें और औज़ारों और श्रमिकों में साफ़-सफ़ाई का उच्च स्तर रखें।.

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