- टमाटर

टमाटर टमाटर

एंथ्रेक्नोज

फफूंद

Colletotrichum spp.


संक्षेप में

  • पत्तियों, तनों, फलियों तथा फलों पर पानी से भरे हुए घाव.
  • अंडाकार घाव स्पष्ट रंग के किनारों से घिरे होते हैं.
  • तने का निचला हिस्सा गहरे भूरे रंग का और खुरदुरा होता है.
  • अत्यधिक प्रभावित होने पर पत्तियों का झड़ना, पौधे का गिर जाना या शाखाओं के सिरों का मर जाना।.
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लक्षण

लक्षणों की तीव्रता फसल के प्रकार, प्रजाति तथा वातावरण की परिस्थितियों से प्रभावित होती है। पत्तियों, तनों, फलियों तथा फूलों पर भूरे से ले कर धूप से जले हुए से रंग के घाव नजर आते हैं। ये घाव गोलाकार से ले कर अंडाकार या किसी भी असमान आकृति के हो सकते हैं और इनके किनारे लालिमा लिए हुए या बैंगनी रंग लिए हुए गहरे कत्थई रंग के होते हैं। अनुकूल मौसम की परिस्थितियों में ये संख्या में बहुत अधिक हो जाते हैं, बड़े हो जाते हैं और आपस मे मिल जाते हैं और इस प्रक्रिया के दौरान गहरे कत्थई या काले रंग के हो जाते हैं। इनका केंद्र धीरे-धीरे भूरे रंग का हो जाता है और संक्रमण के बाद के चरणों में इनमें सूक्ष्म बिखरी हुई काली चित्तियाँ नजर आतीं हैं। कुछ फसलों में पत्तियों की मध्य शिरा का लाल रंग में बदरंग होना भी देखा गया है। गम्भीर मामलों में, पत्तियाँ मुरझा कर सूख जातीं हैं और गिर जातीं हैं जिससे पौधे में असमय पर्णपात हो जाता है। तनों पर घाव लंबाई में, धंसे हुए और गहरे किनारों वाले भूरे होते हैं। जैसे-जैसे ये बढ़ते हैं, घाव तने के आधार को जकड़ लेते हैं जिससे पौधा मुरझा कर मर जाता है। तनों या शाखाओं में शीर्ष का मरना भी सामान्य है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

लक्षणों का कारण कोलेटोट्राईकम एसपीपी प्रजाति की कवक की विभिन्न प्रजातियां हैं। ये मिट्टी में, बीजों के साथ जुड़े हुए, या पौधों के अवशेषों या वैकल्पिक मेजबानों पर चार वर्षों तक जीवित रहते हैं। संक्रमण नए पौधों तक दो प्रकार से फैलता है। प्राथमिक संक्रमण तब होता है जब मिट्टी या बीजों पर पलने वाले जीवनज नवांकुरों को निकलने के समय, ऊतकों में व्यवस्थित रूप से बढ़ते हुए संक्रमित करते हैं। दूसरे प्रकार में, जीवाणु निचली पत्तियों पर बारिश के छींटों के साथ पहुंचते हैं और ऐसा संक्रमण आरंभ करते हैं जो ऊपर की ओर बढ़ता है। द्वितीयक संक्रमण तब आरंभ होता है जब पत्तियों या फलों में उत्पन्न जीवाणु वर्षा के छींटों, ओस, कीटों के चूसने या खेतों में मजदूरों के द्वारा पौधों के ऊपरी भागों या अन्य पौधों में प्रसारित होता है। ठंडे से ले कर ऊष्ण तापमान (20 से 30 डिग्री से. आदर्श) उच्च पीएच वाली मिट्टी, पत्तियों का लंबे समय तक गीला रहना, बार-बार बारिश और घनी छतरियाँ रोग के लिए अनुकूल होतीं हैं। संतुलित उर्वरीकरण फसल को एंथ्रोक्नोज के प्रति कम संवेदनशील बनाता है।

जैविक नियंत्रण

रोग के प्रसार को बुआई से पूर्व बीजों को गर्म पानी में डाल कर रोका जा सकता है। (तापमान और समय आपकी फसल पर निर्भर करता है) नीम के तेल का छिडकाव किया जा सकता है। जैविक कारक भी संक्रमण को नियंत्रित करने में सहायता कर सकते हैं। ट्राईकोडर्मा हेराजियम कवक और सुडोमोनस फ्लूरोसेन्स, बेसिलस सबटिलिस या बी. माईलोलिकफेसिन जीवाणु पर आधारित उत्पादों का बीज उपचार के अंग के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। एक बार लक्षण पहचान लेने के बाद कई प्रकार की फसलों में इस रोग के विरुद्ध जैविक रूप से संस्तुत कॉपर के मिश्रणों का छिड़काव किया जा सकता है।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा निरोधात्मक उपायों के साथ जैविक उपचार, यदि उपलब्ध हों, के समन्वित प्रयोग पर विचार करें। छिडकाव सुबह के समय जल्द करें तथा गर्म मौसम में इसका प्रयोग करने से बचें। साथ ही, रोपाई से पहले बीजों का उपचार करें। बुआई से पहले कवक को मारने के लिए बीजों का लेपन किया जा सकता है। संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन, बॉस्केलिड, क्लोरोथेलोनिल, मानेब, मानकोजेब या प्रोथियोकोनजोल वाले कवकरोधकों का निरोधात्मक रूप से छिड़काव किया जा सकता है। (कृपया आपकी फसल के अनुरूप सम्मिश्रण और सलाह को जाँच लें) इन में से कुछ उत्पादों के प्रति प्रतिरोध के कुछ मामले देखे गए हैं। कुछ फसलों में, कोई भी प्रभावी उपचार उपलब्ध नहीं है। अंत मे, विदेश भेजे जाने वाले फलों पर प्रकोप को कम करने के लिए खाये जाने वाली मोम का उपयोग फसल कटने वाले उपचारों के साथ किया जा सकता है।

निवारक उपाय

  • पौधों को अच्छी जलनिकासी वाली मिट्टी में लगायें.
  • पौधों को रोगों का प्रतिरोध करने में सहायता करने के लिए मिट्टी को कम्पोस्ट से समृद्ध बनाएं.
  • यदि संभव हो तो कम वर्षा वाले स्थानों को चुनें.
  • खेतों को अच्छी जलनिकासी प्रदान करें.
  • स्वस्थ पौधों या किसी प्रमाणित स्त्रोत से प्राप्त बीजों का उपयोग करें.
  • यदि आपके क्षेत्र में उपलब्ध हो तो कोई अधिक प्रतिरोधी प्रजाति का चयन करें.
  • प्रतिरोधी पौधे लगायें या स्वस्थ पौधे खरीदें.
  • बुआई के समय पौधों के मध्य अधिक दूरी रखें.
  • खेतों या बागानों में रोग के चिन्हों के लिए निगरानी रखें.
  • खेतों में तथा उसके आस-पास स्वतः उगने वाले पौधों या खर-पतवारों को हटा दें.
  • पत्तियों तथा तनों के चारों ओर हवा के संचालन को बेहतर बनाने के लिए लम्बे पौधों, जैसे कि टमाटर, के खूँटे बांधें.
  • खेतों के चारों ओर निरोधक फसल या पेड़ लगाएं.
  • खेत या बागान में अच्छी स्वच्छता, उदाहरण के लिए पौधों के अवशेषों को हटाना, बनाये रखें.
  • जब पत्तियाँ गीली हों तब खेत मे मशीनों या श्रमिकों की आवाजाही से बचें.
  • अपने औजारों तथा उपकरणों को सावधानी पूर्वक साफ करें.
  • रोग को फैलने से रोकने के लिए जब पौधे गीले हों तब बागीचे से दूर रहे और उपयोग के बाद बागीचे के सभी उपकरणों को संक्रमणमुक्त (4 भाग पानी में एक भाग ब्लीच) करने का ध्यान रखें.
  • यदि सिंचाई की आवश्यकता हो, तो उसे सुबह के समय नियोजित करें जिससे कि रात तक पत्तियाँ सूख जाएं.
  • ऊपर से सिंचाई करने की अपेक्षा ड्रिप स्प्रिंकलर से सिंचाई करें.
  • जब पौधे गीले हों तब उन्हें न छुएं.
  • तीव्र लक्षणों से बचने के लिए जल्दी कटाई करें.
  • फलों का हवा के अच्छे संचरण वाले वातावरण में भंडार करें.
  • पौधों के अवशेषों को जमीन पर छोड़ दें क्योंकि कवक ऐसे जल्दी सड़ाती है.
  • इसके बजाय, पौधों के अवशेषों को जल्द सड़ाने के लिए मिट्टी में बहुत गहरे दबा दें.
  • गैर-मेजबान फसलों के साथ लंबे समय के लिए (3-4 वर्ष या अधिक) फसल चक्रीकरण की योजना बनाएं।.

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