- सिट्रस (नींबू वंश)

सिट्रस (नींबू वंश) सिट्रस (नींबू वंश)

नींबू-वंश का हरितमा रोग (सिट्रस ग्रीनिंग)

बैक्टीरिया

Liberibacter asiaticus


संक्षेप में

  • पत्तियों पर छितरे हुए छोटे धब्बे.
  • शिराओं का पीला पड़ना.
  • पेड़ों का विकास अवरुद्ध होना.
  • समय से पूर्व पत्तियों का गिरना.
  • फलों का हरा पड़ना और कम विकसित रहना।.
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सिट्रस (नींबू वंश) सिट्रस (नींबू वंश)

लक्षण

सबसे पहला लक्षण पेड़ पर पीली टहनी दिखना है। इसी से इसे इसका एक प्रचलित नाम हुआंगलॉन्गबिंग मिला है, जिसका अनुवाद पीला ड्रैगन रोग है। पत्तियां धीरे-धीरे पीली और चितकबरे धब्बों वाली हो जाती हैं, जैसे ज़िंक या मैंगनीज़ की कमी होने पर होता है। दोनों में अंतर बताने का एक अच्छा तरीका यह है कि इन दोनों की कमी के कारण हुए लक्षण पत्ती शिरा के साथ-साथ व्यवस्थित दिखाई देते हैं जबकि रोग के लक्षण अव्यवस्थित होते हैं। स्थाई रूप से संक्रमित पेड़ों का विकास रुक जाता है, समय से पहले पत्तियां गिर जाती हैं और टहनियां सिरे से मरन शुरू हो जाती हैं। पेड़ पर कई बेमौसम फूल आ जाते हैं जो बाद में गिर जाते हैं। फल छोटे, अनियमित आकार के, और आधार पर हरे रंग के मोटे छिलके वाले होते हैं (इसीलिए इस रोग को नींब वंश का हरितमा रोग या सिट्रस ग्रीनिंग कहते हैं)।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

हुआंगलॉन्गबिंग (HLB) के लक्षणों का कारण जीवाणु कैंडिडेटस लाइबेरिबैक्टर एशियाटिकस है। इसे नींबू वंश की फसलों के बाग़ानों के दो आम साइलिड रोगजनक, डायफ़ोरिना सिट्रि और ट्राइओज़ा इरिट्री लगातार फैलाते रहते हैं। कीटडिंभ और वयस्क दोनों HLB ग्रहण कर सकते हैं और अपने 3 से 4 महीने के जीवनकाल में रोगग्रस्त रहते हुए रोग फैला सकते हैं। हुआंगलॉन्गबिंग सर्वांगी रोग है और लक्षण दिखाई देने से पहले तीन महीने से लेकर कई वर्षों का समय लग सकता है। रोग कलम लगाने से फैल सकता है, हालांकि इसके फैलने की दर भिन्न हो सकती है। बीजों से भी रोग फैल सकता है। कुछ अन्य रोग और विकार भी पत्तियों में इस तरह का चितकबरापन दिखाते हैं। इसलिए कारण सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए ऊतकों का नमूना भेजना अच्छा रहता है।

जैविक नियंत्रण

माफ़ करें, हमें इस रोग के किसी जैविक उपचार की जानकारी नहीं है। इस रोग पर काबू पाने के लिए अगर आप को कुछ पता है, तो कृपया हमें बताएं। हमें आपके सुझावों का इंतज़ार रहेगा।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा एक समेकित दृष्टिकोण से रोकथाम उपायों के साथ-साथ उपलब्ध जैविक उपचारों को अपनाएं। कीटनाशकों के उपयुक्त इस्तेमाल से साइलिड वाहकों पर अच्छी तरह काबू पाकर रोग का फैलाव सीमित किया जा सकता है। तने में एंटीबायोटिक टेट्रासाइक्लिन का इंजेक्शन देने से रोग से आंशिक रूप से उबरा जा सकता है, हालांकि असरदार होने के लिए ऐसा बार-बार करना पड़ेगा। टेट्रासाइक्लिन पेड़ों के लिए विषाक्त है और इस कारण हाल के वर्षों में इसके इस्तेमाल में कमी आई है।

निवारक उपाय

  • देश के पृथककरण (क्वारंटाइन) नियमों की जानकारी रखें.
  • रोग के लक्षणों के लिए नींबू-वंश की फसलों के बाग़ की लगातार निगरानी करें.
  • रोग ग्रस्त पेड़ों को तुरंत हटाएं.
  • बाग़ में श्रमिकों और औज़ारों के बीच सफ़ाई का ध्यान रखें.
  • साइलिड के अन्य मेज़बान जैसे मुराया पैनिकुलेटा, सेवरिनिया बॉक्सीफ़ोलिया और नींब वंश के अन्य पौधों (रूटेसी) को हटा दें।.

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