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यूरोपीय लाल घुन (रेड माइट)

घुन

Panonychus ulmi


संक्षेप में

  • पत्तियों पर हल्के तांबे के रंग के धब्बे हो जाते हैं, जो पत्तियों के रंग को बेरंगा करते हुए उसे तांबे या ज़ंग लगे हुए भूरे रंग जैसा कर देते हैं.
  • पत्तियाँ विकृत होकर ऊपर की ओर मुड़ सकती हैं.
  • लकड़ी का अपर्याप्त मात्रा में विकास, फलों का कम पकना या कच्चे फलों का टूटकर गिर जाना।.
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लक्षण

हल्के संक्रमण में, पत्तियों पर मुख्य शिराओं के बगल में हल्के तांबे के रंग के धब्बे हो जाते हैं। जैसे-जैसे घुनों की संख्या में वृद्धि होती है, घुनों के चूसने की क्रिया के परिणामस्वरूप होने वाले ये धब्बे पूरी पत्ती में फैल सकते हैं। पत्तियाँ ऊपर की ओर मुड़ सकती हैं और पत्तियों के झुण्ड का रंग तांबे नुमा या ज़ंगनुमा भूरा हो सकता है। पत्तियों व कलियों को होने वाले नुकसान के कारण वृक्ष के प्रकाश संश्लेषण में कमी आ जाती है और जिसके कारण नई टहनियां कम निकलती हैं, लकड़ी का विकास अपर्याप्त होता है, फल कम पकते हैं या कच्चे फल वृक्ष से गिर जाते हैं। इसके कारण सर्दी के पाले के प्रति नई टहनियों की संवेदनशीलता में वृद्धि होती है और आने वाले मौसम में खिलने वाले फूलों की संख्या में कमी पैदा हो जाती है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

ये लक्षण यूरोपीय रेड माइट (पेनोनायकस उल्मी) की आहार ग्रहण करने की क्रिया के कारण उत्पन्न होते हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में चकोतरा व गुठलियों वाले फलों, के साथ-साथ अंगूर की बेलें भी संक्रमित हो सकती हैं। नर पीठ पर दो लाल रंग के हल्के घब्बों के साथ पीले लाल रंग का होता है तथा लगभग 0.30 मि.मी. लंबा होता है। मादाएं कुछ अधिक लंबी (0.35 मि.मी.) होती हैं और नरों से अधिक अंडाकार होती हैं। उनको ईंट जैसे लाल रंग के शरीर व पीठ पर मौजूद मोतियों जैसे धब्बों से निकलने वाले मज़बूत सफ़ेद बालों के द्वारा पहचाना जा सकता है। वे मुख्यतया छाल की दरारों, फल की पंखुड़ियां या निष्क्रिय कलियों पर गर्मी के आखिर के दिनों में तथा वसन्त के दोरान पत्तियों के पिछले हिस्से पर लाल रंग के अंडे देती हैं। प्रतिवर्ष पीढ़ियों की संख्या तापमान व भोजन आपूर्ति के द्वारा नियंत्रित होती है और इसमे ठंडे मौसम में 2-3 तक लेकर गर्म मौसम में 8 तक का अंतर हो सकता है। नाइट्रोजन की अतिरिक्त आपूर्ति पौधे की वृद्धि में तेज़ी पैदा करती है तथा कीटों के लिए अनुकूलनीय होती है। इसके विपरीत, हवा व बारिश के कारण कीटों की मृत्युदर में वृद्धि होती है।

जैविक नियंत्रण

परभक्षी घुनों के द्वारा जैविक नियंत्रण फलों के वृक्षों वाले बग़ीचों पर बेहतर रूप से कार्य करता है। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक प्रतिरोधियों/विरोधियों में फूलों के कीड़े, लेडीबग, केपसिड बग की कुछ विविध प्रजातियाँ, और इनके साथ-साथ काँच के जैसे पंखों वाले मिरिड बग (हायएलियोड विट्रिपेन्निस) या स्टेथोरस पंक्टम शामलि हैं। स्वीकृत संकीर्ण सीमा वाले तेलों का भी प्रयोग किया जा सकता है।

रासायनिक नियंत्रण

जैविक उपचार, अगर उपलब्ध हो तो, और बचाव उपायों के साथ एक संयुक्त दृष्टिकोण पर हमेशा विचार करें। अगर सीमा पार हो गई है, और सर्दी में टहनियों के सिरे पर लाल रंग के अंडों के ढेर पाए जाते हैं, तो एकेरिसाइड या मिटिसाइड का प्रयोग किया जा सकता है। सामान्य तौर पर, रसायनिक उपचार का न्यूनतम मात्रा में उपयोग करने का प्रयास करें। इससे लाभकारी कीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है तथा इसके कारण कुछ घुनों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने की शुरूआत हो सकती है। उद्यान-कृषि संबंधी खनिज तेल का भी उपयोग करके इनकी संख्या में कमी लाई जा सकती है।

निवारक उपाय

  • प्रतिरोधियों की संख्या को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पौधों की एक उच्च विविधता को क़ायम रखें.
  • गंभीर संक्रमण के मामले में, प्रभावित पौधों के हिस्सों को काट दिया जाना चाहिए.
  • लाभकारी कीटों पर प्रभाव को कम करने के लिए कीटनाशकों के उपयोग को नियंत्रित करें.
  • वृक्षों को धूल से बचाने के लिए उनकी भली प्रकार सिंचाई करें।.

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