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एफ़िड्स (माहू)

कीट

Aphidoidea


संक्षेप में

  • घुमावदार पत्तियां एवं नवांकुर.
  • पत्तियों एवं अंकुरों का पीला होना एवं मुरझा जाना.
  • अवरुद्ध विकास।.
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लक्षण

कम से लेकर मध्यम संख्या आम तौर पर फसलों के लिए हानिकारक नहीं होती है। गंभीर संक्रमण के कारण पत्तियां और टहनियां मुड़ सकती हैं, कुम्हला सकती हैं, या पीली पड़ सकती हैं। साथ ही पौधे के विकास को नुकसान हो सकता है। पौधे की शक्ति में सामान्य गिरावट भी देखी जाती है। माहू द्वारा उत्पादित मधुरस (हनीड्यू) अतिरिक्त संक्रमण और कई मामलों में अवसरवादी फफूंद का स्रोत हैं। पत्तियों पर फफूंद की उपस्थिति इस बात का सबूत हैं। मधुरस चीटियों को आकर्षित करती है। माहू की एक छोटी संख्या भी एक पौधे से दूसरे पौधे तक एक सतत तरीके से वीषाणु प्रसारित कर सकते हैं।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

माहू (एफ़िड) छोटे, नरम शरीर के कीड़े हैं, जिनके लंबे पैर और एंटीना होते हैं। प्रजातियों के आधार पर उनके शरीर का आकार 0.5 से 2 मिमी और उनके शरीर का रंग पीला, भूरा, लाल या काला हो सकता है। वे सर्वाधिक पाए जाने वाले पंखहीन किस्मों से लेकर पंख वाले, मोमी या ऊनी प्रकार के हो सकते हैं। वे आमतौर पर पोषक छोटी पत्तियों की निचली सतह और नई टहनियों के कोनों पर समूहों में भोजन करते हैं। वे अपने लंबे मुंह के प्रयोग से पौधे के मुलायम ऊतकों मे छेद करतें हैं और रस चूसते हैं। कम से लेकर मध्यम संख्या आम तौर पर फ़सलों के लिए हानिकारक नहीं होती है। वसंत के अंतिम हिस्से या गर्मियों की शुरुआत मे प्राकृतिक दुश्मनों की वजह से आम तौर पर माहू की आबादी स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है। कई प्रजातियों में पौधे के विषाणु होते हैं, जो अन्य रोगों के विकास के लिए अवसर पैदा कर सकते हैं।

जैविक नियंत्रण

हल्के संक्रमण के मामले में, आम नर्म कीटनाशक साबुन का घोल या कीटनाशक तेल पर आधारित घोल का उपयोग करें, उदाहरण के लिए, नीम का तेल (3 मिली/लीटर)। नमी के दौरान, माहू फफूंद की बीमारियों के प्रति भी संवेदनशील होते हैं। प्रभावित पौधों पर पानी का एक साधारण छिड़काव भी उन्हें हटा सकता है।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा एक समेकित दृष्टिकोण पर विचार करें जिसमें जैविक उपचार, यदि उपलब्ध हों, के साथ निरोधात्मक उपायों का भी प्रयोग किया जाए। ध्यान रखें कि रासायनिक कीटनाशकों के उपयोग से एफ़िड्स (माहू) पर में प्रयोग किये जाने वाले उत्पादों के प्रति प्रतिरोध क्षमता विकसित हो सकती है। बुवाई के 30, 45, 60 दिनों बाद 1:20 के अनुपात में फ़्लोनिसेमिड और पानी को तनों पर लगाया जा सकता है। प्रति लीटर पानी, 2 मिलीलीटर फ़िप्रोनिल या 0.2 ग्राम थियामेथोक्सैम या 0.3 ग्राम फ़्लोनिसेमिड या 0.2 ग्राम एसिटामिप्रिड का भी उपयोग किया जा सकता है।

निवारक उपाय

  • खेतों के आसपास पौधों की विभिन्न किस्मों की एक उच्च संख्या बनाए रखें.
  • पिछली फ़सलों के पौधों के मलबे को हटा दें.
  • माहू की आक्रामक आबादी को दूर रखने के लिए परावर्तक पलवार का इस्तेमाल करें.
  • रोग या कीट की उपस्थिति और गंभीरता का अंदाज़ा लगाने के लिए खेतों की नियमित जांच करें.
  • संक्रमित पौधे के हिस्से को हटा दें.
  • खेत में और खेत के आसपास खरपतवार की जांच करें और उन्हें हटा दें.
  • अधिक पानी या अधिक-उर्वरक का प्रयोग न करें.
  • माहू की सुरक्षा करने वाली चींटियों की आबादी को चिपचिपी पट्टियों के साथ नियंत्रित करें.
  • छतरी से हवा की आवाजाही को बेहतर करने के लिए अपने पेड़ों की शाखाओं की छटाई करें या अपने पौधों की निचली पत्तियों को निकाल दें.
  • यदि संभव हो, तो पौधों की रक्षा के लिए जाल का इस्तेमाल करें.
  • कीटनाशकों के उपयोग को नियंत्रित करें ताकि फ़ायदेमंद कीड़ों को नुकसान न पहुंचें।.

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