- केला

केला केला

स्यूडोस्टेम वीविल

कीट

Odoiporus longicollis


संक्षेप में

  • पत्तियों के आवरण के आधार पर या युवा पौधों के तने पर छोटे छेद और जेली गोंद के जैसे मलत्याग दिखाई देते हैं.
  • लार्वा तने में सुरंग बनाते हुए प्रचुर मात्रा में कीटमल छोड़ते हैं.
  • पत्तियां पीली हो जाती हैं और पौधे की वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है.
  • तने के कमज़ोर होने से तेज़ हवाओं के मौसम के दौरान पौधे टूटकर गिरने लगते हैं.
  • फुलों के गुच्छे ठीक से विकसित नहीं हो पाते हैं।.
 - केला

केला केला

लक्षण

संक्रमण के पहले लक्षण हैं, पत्तियों के आवरण के आधार पर या युवा पौधों के प्रतीत होने वाले तने पर छोटे छेदों की उपस्थिति और जेली गोंद उत्सर्जन। लार्वा का भूरे रंग का कीटमल भी छेद के आसपास दिखाई देता है। लार्वा तने पर सुरंग बनाते हैं, जिससे गंभीर क्षति होती है और ऊतकों तक पानी और पोषक तत्वों का परिवहन अवरुद्ध हो जाता है। पत्तियां पीली हो जाती हैं और पौधों की वृद्धि अवरुद्ध हो सकती है। गंभीर संक्रमणों में, तने के कमज़ोर पड़ने के कारण तेज़ हवाओं या तूफ़ान के दौरान पौधे टूटकर गिरने लगते हैं। ऊतक तेज़ी से फीके पड़ जाते हैं और घावों में अवसरवादी रोगजनकों की मौजूदगी के कारण एक बदबूदार गंध आने लगती है। संक्रमित पौधों में, कीट के जीवन के सभी चरण पूरे साल मौजूद होते हैं। गुच्छे या फल ठीक से विकसित नहीं हो पाते हैं।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

वयस्क कीट काले रंग के, लगभग 30 मिमी लंबे, एक नोकिले सिर और एक चमकदार कवच के साथ होते हैं। वे मुख्य रूप से रात के समय निकलते हैं, लेकिन ठंडे महीनों या बादलों के दिनों में दिन में भी देखे जा सकते हैं। वे केले के पौधों द्वारा उत्सर्जित परिवर्तनशील पदार्थों द्वारा आकर्षित होते हैं। मादाएं पत्तियों के आवरण में दरारें बनाकर उसके ऊपर-ऊपर सफ़ेद मलाईदार, अण्डाकार अंडे देती हैं। 5-8 दिनों के बाद उन अंडों में से मांसल, बिना पैर वाले, और पीले सफ़ेद रंग के लार्वा निकलते हैं और पत्तियों के आवरण के मुलायम ऊतकों पर भोजन करना शुरू कर देते हैं। वे बड़े पैमाने पर 8 से 10 सेमी लंबी सुरंगें खोदते हैं, जो पौधे के तने, उसकी जड़ों या गुच्छे के डंठल तक पहुंच सकते हैं। वयस्क कीट उड़ने में माहिर होते हैं और आसानी से एक पौधे से दूसरे तक जा सकते हैं और इस तरह से कीट फैलते रहते हैं।

जैविक नियंत्रण

स्टाइनरनेमा कार्पोकैप्से या आर्थरोपोड्स की कुछ प्रजातियों के गोल कीड़ों (नीमाटोड) का इस्तेमाल इन कीटों के विरुद्ध सफलतापूर्वक किया जा चुका है। एक अन्य रणनीति है, रोगजनकों के साथ इन कीटों को संक्रमित कर दिया जाए, उदाहरण के लिए कवक रोगजन्य मेटार्हिज़ियम एनिसोप्लाई के साथ।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो जैविक उपचार के साथ निवारक उपायों के एकीकृत दृष्टिकोण पर हमेशा विचार करें। लार्वा को मारने के लिए, ऑर्गेनोफ़ोस्फ़ोरस यौगिकों वाले कीटनाशकों का तने में इंजेक्शन लगाया जा सकता है। फसल काटने के बाद, प्रभावित तनों को हटा दें और अंडे देने वाली मादाओं को नष्ट करने के लिए कीटनाशक (2 ग्रा/ली) के साथ उपचार करें।

निवारक उपाय

  • प्रमाणित स्रोतों से स्वच्छ रोपण सामग्री का उपयोग सुनिश्चित करें.
  • यदि उपलब्ध हो, तो अधिक प्रतिरोधी किस्मों को लगाएं.
  • सभी पौधों के अवशेषों को टूटे और क्षयकारी पौधों के साथ निकालें और जलाएं, क्योंकि ये अन्यथा वयस्कों के लिए प्रजनन स्थल के रूप में काम कर सकते हैं.
  • लंबाई में विभाजित की गई टहनियों को ज़मीन पर रखकर छद्म-जाल के रूप में इस्तेमाल करें.
  • ये कटे हुए टुकड़े वयस्क मादा कीटों को भोजन करने और अंडे देने के लिए आकर्षित करते हैं.
  • जैसे ही लार्वा निकलता है, ये टुकड़े शुष्क हो जाते हैं और अंततः निर्जलीकरण के कारण लार्वा मर जाते हैं।.

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