- कपास

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तंबाकू की कली की इल्ली (बडवॉर्म)

कीट

Chloridea virescens


संक्षेप में

  • लार्वा मुख्य रूप से कलियों, बौरों और अंतिम कोमल पत्तियों पर हमला करता है.
  • संक्रमित कलियां पीलr पड़ जाती हैं और पौधे से अलग हो जाती हैं.
  • फलों के आधार पर चबाने के छेद होते हैं, जो खोखले हो जाते हैं, और उनकी सतह पर गोल छेद होते हैं।.
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लक्षण

फ़सल के आधार पर लक्षण काफ़ी विविध हो सकते हैं। लार्वा कलियों, बौरों और कोने की कोमल पत्तियों में सुरंग बनाते हैं और भोजन करते हैं, जिससे विकसित हो रहे ऊतकों को नुकसान पहुंचता है। यदि प्रजनन ऊतक उपलब्ध न हो, तो पत्तियों, डंठलों और टहनियों जैसे पौधे के अन्य अंगों पर भी हमला हो सकता है। जिन कलियों पर हमला होता है, वे पीली पड़ जाती हैं और पौधों से अलग हो सकती हैं। कपास और दलहनों में, बीजकोष और फलियों के आधार पर छेद और नम मल देखा जा सकता है। इल्लियों के सतह पर भोजन करने के कारण गोलाकर छेद भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में, फल अंदर से खाली हो जाते हैं और वे सड़ना शुरू कर सकते हैं। कपास में, क्षति का स्वरूप और चोट का स्तर मकई की बालियों के कीट (ईयरवॉर्म) द्वारा पहुंचाई गई हानि की तरह होता है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

क्षति का कारण तंबाकू की कलियों की इल्ली (बडवॉर्म), क्लोरिडिया विरेसेंस, होती है। यह कई फ़सलों में एक महत्वपूर्ण कीट है, जिनमें सोयाबीन और कपास (आमतौर में रेतीले क्षेत्रों में) शामिल हैं। पतंगे रंग में भूरे होते हैं, और कभी-कभी उनमें हल्का हरा रंग भी दिखाई दे सकता है। इनके पंख भी भूरे होते हैं। इनके आगे के पंखों को तीन गहरी भूरी पट्टियां, जिनकी सीमाएं कभी-कभी सफ़ेद या मलाईदार रंग की होती हैं, आड़े तरीक़े से काटती हैं। पीछे के पंख सफ़ेद-से होते हैं, और उनके किनारों पर एक गहरे रंग की पट्टी होती है। मादाएं बौरों, फलों और अंतिम पत्तियों पर गोलाकार, चपटे अंडे देती हैं। बड़े लार्वा सबसे हानिकारक होते हैं क्योंकि ये बौरों और फलों को अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं, और उन्हें मौसम के बाद के हिस्से में भी क्षति पहुंचा सकते हैं, जब पौधे के लिए नई पत्तियां उगाना मुश्किल हो जाता है। पतंगे 20° सेल्सियस के तापमान पर 25 दिनों तक जीवित रह सकते हैं।

जैविक नियंत्रण

बैसिलस थुरिंजिएंसिस, नोसेमा एसपीपी., स्पिकेरिया रिलेयी या न्यूकलियर पॉलीहेड्रो वायरस पर आधारित उत्पादों का छिड़काव करके तंबाकू के बडवॉर्म पर नियंत्रण पाया जा सकता है। ततैये (पोलिस्टेस एसपीपी.), बिगआई कीट, डैम्सल कीट, माइन्यूट पाइरेट कीट (ओरियस एसपीपी.) और मकड़ियों जैसे प्राकृतिक शत्रुओं को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। परजीवियों में सब्ज़ियों के लिए ट्राइकोग्रामा प्रेटियोसम और कार्डियोचिलेस निग्रिसेप्स और अन्य फ़सलों के लिए कोटेसिया मार्जिनिवेंट्रिस शामिल हैं। अन्य परजीवी जिनका उपयोग किया जा सकता है, उनमें शामिल हैं: आर्काइटैस मारमोराटस, मिटियोरस ऑटेग्राफ़ा, नेटेलिया सेयी, प्रिस्टोमेरस स्पिनेटर और कैम्पोलेटिस एसपीपी. प्रजाति के कई कीड़ें।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो जैविक उपचार के साथ निवारक उपायों के एकीकृत दृष्टिकोण पर हमेशा विचार करें। इस कीट का नियंत्रण अनेक कारणों से विशेष रूप से मुश्किल साबित हुआ है। क्लोरेन्ट्रेनिलिप्रोल, फ़्लुबेंडियामाइड या एस्फ़ेनवलेरेट युक्त कीटनाशकों को भी कलियों की इल्ली को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ मुख्य कीटनाशकों के विरुद्ध प्रतिरोध आम है, इनमें पायरेथ्रोइड उपचार भी शामिल हैं। व्पापक प्रभाव वाले कीटनाशकों से बचा जाना चाहिए, क्योंकि ये लाभकारी कीड़ों को भी समाप्त कर सकते हैं।

निवारक उपाय

  • अगर आपके क्षेत्र में उपलब्ध हों, तो प्रतिरोधी पौधे लगाएं.
  • मौसम में जल्दी पकने वाले या जल्दी बुवाई वाली क़िस्मों का उपयोग करें.
  • फूलों के खिलने की अवस्था के लगभग 1 से 2 हफ़्तों बाद कीट की उपस्थिति पर नज़र रखें.
  • पतंगों पर निगरानी रखने के लिए या उन्हें पकड़ने के लिए फ़ेरोमोन चारे का उपयोग करें.
  • बुवाई के समय पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखें.
  • खर-पतवार का अच्छा प्रबंधन करें.
  • संतुलित उर्वरीकरण करें.
  • अत्यधिक सिंचाई से बचें.
  • यदि संभव हो, तो फ़सल जल्दी पक जाए, इसके लिए क़दम उठाएं.
  • कटाई के बाद अगले मौसम में कीट के प्रसार को रोकने के लिए सभी अवशेष हटा दें।.

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