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मक्का, बाजरा और ज्वार का स्टिंक बग

कीट

Euschistus spp.


संक्षेप में

  • क्षति की भरपाई के लिए पौधा अतिरिक्त किल्ले (अतिरिक्त शाखाएं) पैदा कर सकता है.
  • पत्तियों को खाने के कारण हुई हानि छिद्रों की कई कतारों के रूप में दिखती है.
  • गंभीर रूप से प्रकोपित पौधों की आकृति विकृत हो जाती है, वे छोटे रह जाते हैं तथा उनकी उपज कम होती है.
  • बालियों में भी विकृति हो जाती हैं, वे देरी से पकती हैं और दाने अच्छी तरह नहीं भर पाते हैं।.
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लक्षण

स्टिंक बग मुख्य रूप से अंकुर फूटने या शुरुआती बढ़वार चरणों के दौरान हमला करता है। मुख्य डंठल को हुई क्षति की भरपाई करने के लिए पौधा अतिरिक्त किल्ले (अतिरिक्त शाखाएं) पैदा कर सकता है। कीट समान दूरी पर बने कई छिद्रों या कतारों में पत्तियों को खाता है। छिद्रों के आकार में बहुत अंतर होता है, लेकिन वे अक्सर पीले आभामंडल के साथ अण्डकार या लंबाकार होते हैं। डंठल के जिस स्थान पर स्टिंक बग खाता है, वहां चिपचिपी क्षीण सतह देखी जा सकती है। गंभीर रूप से प्रकोपित पौधों की आकृति विकृत हो जाती है, वे छोटे रह जाते हैं, तथा उनकी उपज कम होती है। बालियों में भी विकृति हो जाती हैं, वे देरी से पकती हैं और दाने अच्छी तरह नहीं भर पाते हैं। स्टिंक बग बहुत अच्छी उड़ान भरते हैं और जल्द फ़सलों के बीच फैल जाते हैं, जिससे उपज हानि होती है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

प्रजातियों के आधार पर इन कीटों के स्वरूपों में थोड़ा अंतर होता है। भूरे स्टिंक बग के वयस्क ढाल-आकृति वाले चितकबरे भूरे रंग और चमड़े जैसे पंखों वाले होते हैं। पीठ पर त्रिकोणीय आकृतियां इनकी पहचान होती है। इनके अण्डे बंदूक की नली के आकार के होते हैं और पत्तियों पर समूह में दिए जाते हैं। निम्फ़ लगभग गोल व काले रंग के तथा पंखविहीन होते हैं। वयस्क व निम्फ़ अपने मुंह के चूसने वाले हिस्सों से ऊतकों में छेद करके वहां की सामग्री पचाने के लिए कुछ पदार्थों को भीतर डालते हैं, फिर वे घुली हुई पौधा सामग्री को पुनः खाते हैं। इसके कारण विकृति तथा कम वृद्धि जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। ये तब और अधिक बढ़ जाती हैं जब इन कीटों की संख्या ज़्यादा होती है। फलों व बीजों पर खाने के कारण दाग़-धब्बे बन जाते हैं। भक्षण के कारण विषमताएं उत्पन्न हो जाती हैं, जिससे उत्पाद की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। स्टिंक बग के कई वैकल्पिक मेज़बान होते हैं जैसे खर-पतवार और कई खाद्यान्न फ़सलें जैसे कि सोयाबीन, सब्ज़ियां और एल्फ़ा-एल्फ़ा।

जैविक नियंत्रण

कीट-परजीवी टेकिनिड मक्खियां और ततैया, स्टिंक बग के अंडों पर अंडे देती हैं और बाद में उनका लार्वा अण्डों से निकल रहे कीड़ों को खाता है। पक्षी व मकड़ियां भी प्रकोप कम करने में सहायक हो सकते हैं। यूकेलिप्टस यूरोग्रेन्डिस का तेल कीटों और उनके निम्फ़ के लिए ज़हरीला होता है।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा एक समेकित नज़रिये से रोकथाम उपायों के साथ-साथ उपलब्ध जैविक उपचारों को अपनाएं। पायरेथ्रोइड समूह के कीटनाशकों से बीजों का उपचार करने से अंकुरों में कुछ नियंत्रण व हानि से बचाव हो सकता है। बायफ़ेन्थ्रिन पर आधारित कीटनाशकों का पत्तियों पर छिड़काव करने से कीटों की संख्या नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।

निवारक उपाय

  • कीटों की चरम आबादी से बचने के लिए पौधों का शीघ्र रोपण करें.
  • खेत की नियमित रूप से निगरानी करें और खेत से खर-पतवारों को हटा दें.
  • कटाई के बाद बचे पौधों के अवेशेषों को खेत से साफ़ कर दें.
  • जुताई नहीं करना या गीली घास की उपस्थिति के कारण संक्रमण के होने का खतरा बढ़ जाता है.
  • कीट के प्रवास को कम करने में खेतों के बीच में अवरोधक लगाना मददगार साबित हो सकता है।.

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