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कॉटनी कुशन स्केल (शल्क कीट)

कीट

Icerya purchasi


संक्षेप में

  • वयस्क और कीटडिंभ तेज़ी से पौधों के रस को चूसते हैं और प्रचुर मात्रा में मधुरस बनाते हैं.
  • पत्तियों का मुरझाना और शाखाओं का सिरों से मृत होना देखा जाता है.
  • मधुरस की प्रचुर मात्रा काली मटमैली फफूंदी के विकास को बढ़ावा देती है.
  • पौधों की मज़बूती घटना और फलों की गुणवत्ता और उपज में भारी कमी।.
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लक्षण

वयस्क और कीटडिंभ तेज़ी से पौधों के रस को चूसते हैं और प्रचुर मात्रा में मधुरस बनाते हैं। इन्हें संवेदनशील पौधों के तने, पत्तियों, फूलों के गुच्छों और नई शाखाओं पर लगभग सभी जगह देखा जा सकता है। रस की कमी से पत्तियां मुरझा जाती हैं और शाखाएं सिरे से शुरू करते हुए मरने लगती हैं (डायबैक)। खाते समय कीट मधुरस की प्रचुर मात्रा का उत्पादन करते हैं जो पत्तियों को ढंक देता है और काली मटमैली फफूंदी के विकास को बढ़ावा देता है। अत्यधिक प्रकोप होने पर, पत्तियों के झड़ने और शाखाओं के मरने के साथ-साथ प्रकाश-संश्लेषण में कमी के कारण पौधे की मज़बूती घटती है और फलों की गुणवत्ता और उपज में काफ़ी कमी आ जाती है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

पौधों पर लक्षण कॉटनी कुशन स्केल (शल्क कीट) आइसरिया परचेज़ी द्वारा पौधे के रस चूसने के कारण होते हैं। कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में प्लैनोकोकस सिट्रि जैसी अन्य प्रजातियाँ प्रबल हो सकती हैं। शल्क कीट लम्बाई में लगभग 10-15 मिमी के होते हैं और परिस्थितियाँ अनुकूल होने पर तकरीबन 2 महीने में अपना जीवन-चक्र पूरा कर सकते हैं। मादाएं 1000 अंडे तक दे सकती हैं, जो वे अपने पेट में एक रुई जैसे अंडे के थैले में रखती हैं और पत्तियों पर देती हैं। नए निकले हुए कीटडिंभ (या रेंगने वाले कीड़े) पहले पत्तियों को, आम तौर पर शिराओं के साथ, और नई शाखाओं को खाते हैं। जैसे-जैसे वे बड़े होते हैं, इन्हें शाखाओं और तने पर भी देखा जा सकता है, किन्तु ये फलों पर कम ही दिखाई देते हैं। इन्हें नम, ठंडा वातावरण पसंद होता है और नींबू वर्गीय पौधों की घनी छतरियों पर ये खूब फलते-फूलते हैं। जैसे-जैसे ये बढ़ते हैं, ये एक रुई जैसी मोम की परत बनाते हैं जो उनकी सुरक्षा करती है। चींटियाँ, जो मधुरस खाती हैं, शल्कों और कीटडिंभ को पालती हैं और उनके प्राकृतिक शत्रुओं की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न करती हैं। मोरा, बबूल (अकेशिया) और रोज़मेरिनस की प्रजातियाँ प्रमुख वैकल्पिक मेज़बान हैं, लेकिन ये विभिन्न प्रकार के फलदार और जंगली पेड़ों के साथ-साथ सजावटी झाड़ियों को भी क्षति पहुंचा सकते हैं।

जैविक नियंत्रण

प्रमुख शिकारी लेडीबर्ड और लेसविंग हैं। विशिष्ट प्राकृतिक शत्रुओं में वेडालिया बीटल और रोडोलिया कार्डिनैलिस हैं जिनके छोटे लार्वा शल्क के अण्डों और बड़े लार्वा शल्क की सभी अवस्थाओं को खाते हैं। परजीवी मक्खी, क्रिप्टोकीटम आइसरी भी इस शल्क की एक प्रभावी परजीवी है।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा एक समेकित नज़रिये से रोकथाम उपायों के साथ-साथ उपलब्ध जैविक उपचारों को अपनाएं। शल्क कीट और कीटडिंभ मोम की मोटी परत से ढंके होते हैं जिसके कारण इनका रासायनिक कीटनाशकों से उपचार कठिन होता है। इस कीट के विरुद्ध एसेटामिप्रिड और मैलाथियॉन के सक्रिय घटकों पर आधारित उत्पादों के सही समय पर इस्तेमाल की सलाह दी जाती है। अण्डों के फूटने के तुरंत बाद पेट्रोलियम स्प्रे तेल के इस्तेमाल से कीटडिंभ से छुटकारा पाया जा सकता है और उन्हें पौधों के हिस्सों पर पलने से रोका जा सकता है।

निवारक उपाय

  • शल्क कीट की मौजूदगी के लिए लगातार बाग़ान की निगरानी करें.
  • प्रत्येक पौधे में कई हरी शाखाएं चुनें और प्रत्येक शाखा पर अंडकोष वाले वयस्क शल्क की मौजूदगी जांचें.
  • कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से बचें क्योंकि यह प्राकृतिक शत्रुओं की संख्या घटाते हैं.
  • पौधों की छंटाई इस प्रकार करें कि छतरी में हवा की आवाजाही अच्छी तरह से हो सके.
  • पौधों से चूषकों और मिट्टी से फ़सल के मृत अवशेषों को हटा दें.
  • कॉटनी कुशन स्केल की मदद करने वाली चींटियों को रोकने के लिए अवरोधकों और जाल का इस्तेमाल करें।.

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