- सिट्रस (नींबू वंश)

सिट्रस (नींबू वंश) सिट्रस (नींबू वंश)

साइट्रस के सिलिड कीट

कीट

Diaphorina citri


संक्षेप में

  • वयस्कों तथा नवजात द्वारा खाये जाने से होने वाला नुकसान और कलियों, फूलों, कोमल टहनियों और छोटे फलों का कमज़ोर होना.
  • मैली फफूँदी की बढ़वार से प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कमी आती है.
  • नई पत्तियों के टेढ़े होने और मुड़ जाने और टहनियों की लंबाई में कमी आने से प्रायः चुड़ैल की झाड़ू जैसा प्रभाव दिखता है।.
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लक्षण

साइट्रस के सिलिड कीट पेड़ों को उनके बढ़वार के चरण और मौसम के समय पर निर्भर करते हुए अलग-अलग तरह से प्रभावित करते हैं। वयस्कों तथा नवजात के भक्षण से नई बढ़वार अर्थात कलियाँ, फूल, मुलायम टहनियाँ और छोटे फल क्षतिग्रस्त और कमज़ोर हो सकते हैं। शर्करायुक्त रस को खाये जाने के दौरान प्रचुर मात्रा में उत्पादित मधुरस के कारण मैली फफूँदी में विकास होता है तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में कमी आती है। अंत मे, अधिक जनसंख्या से नई पत्तियों में मुड़ाव और घुमाव आ जाता है और टहनियों की लंबाई कम होने से चुड़ैल की झाड़ू जैसा प्रभाव दिखता है। बड़ी जनसंख्या से छोटे पेड़ों का विकास बाधित होता है और उपज में भारी कमी आती है। यह कीट अत्यधिक हानिप्रद हो सकता है क्योंकि यह साइट्रस को हरा करने वाले जीवाणुओं का प्रमुख रोगवाहक भी है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

लक्षण साइट्रस के सिलिड, डायफ़ोरिना सिट्री के भक्षण की क्रिया के कारण होते हैं। वयस्क 3 से 4 मिमी लंबे, भूरापन लिए हुए काले सर और धड़, हल्के भूरे पेट और धब्बेदार झिल्ली वाले पंखों के होते हैं। ये तने के ढके हुए हिस्सों या विकसित पत्तियों में सर्दियों भर जीवित रह सकते हैं। किसी वयस्क सिलिड का औसत जीवनकाल तापमान पर निर्भर करता है, 20-30 डिग्री सेल्सियस इसके लिए आदर्श होता है। लंबे जीवनकाल के लिए ठंडा तापमान अनुकूल होता है, जबकि ऊष्ण तापमान जीवनकाल कम कर देता है। मादाएं वसन्त में नई टहनियों या कलियों पर 800 तक नारंगी अंडे दे सकती हैं। नवजात चपटे और आमतौर पर पीले होते हैं और सफ़ेद मोम जैसी परत का रिसाव करते हैं जो उन्हें सुरक्षित रखती है। सफ़ेद मोम जैसी बढ़त या धागे उन्हें माहू से साफ़ तौर पर अलग करते हैं। वयस्कों की तुलना में छेड़े जाने पर नवजात केवल कम दूरी तक जाते हैं। ऊतकों को क्षति पहुंचने से पौधों के सभी भागों तक पोषक तत्वों के पहुंचने की क्षमता बाधित होती है।

जैविक नियंत्रण

सिलिड की कम जनसंख्या अवधि के दौरान शिकारी तथा परजीवी कीट निरंतर नियंत्रण प्रदान करते हैं, उदाहरण के लिए गर्म शुष्क मौसम में। परजीवी कीटों में टेमेरिकसिया रेडियाटा या सिल्फ़ेगस युफ़िलुरे शामिल हैं। शिकारी कीटों में पायरेट बग एंथोकोरिस नेमोरेलिस, लेसविंग क्रिसोपरला कार्निया, तथा लेडी बीटल कॉक्सिनेला सेप्टमपंकटाटा शामिल है। नीम तेल या बागवानी तेल पर आधारित कीटनाशक साबुन भी जनसंख्या नियंत्रण में सहायक होते हैं, किंतु इनका उपयोग नवजात द्वारा सुरक्षात्मक मोम के रिसाव से पूर्व किया जाना चाहिए।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा निरोधात्मक उपायों के साथ जैविक उपचारों, यदि उपलब्ध हों, के समन्वित दृष्टिकोण के समावेश पर विचार करें। डाईमेथोएट पर आधारित कीटनाशकों का समय पर छिड़काव सिलिड के विरुद्ध प्रभावी होता है, किंतु इसका अंतिम विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाना चाहिए। इन उत्पादों का प्रयोग कीटों द्वारा मोम के सुरक्षित रिसाव से पूर्व किया जाना चाहिए, क्योंकि यह उन्हें कुछ प्रतिरोध प्रदान करता है। ध्यान रखें कि अत्यधिक छिड़काव से सिलिड तथा अन्य कीट आसानी से वापस आ सकते हैं। पेड़ पर ऊपर और नीचे जाने वाले वयस्कों को समाप्त करने के लिए, छाल का डाईमेथोएट लेप से उपचार किया जाना चाहिए।

निवारक उपाय

  • वसंत के आरंभ होने के समय से शुरू करते हुए अपने पौधों की सिलिड कीटों के लिए नियमित निगरानी करें.
  • वयस्कों को पकड़ने के लिए चिपकने वाले जालों का प्रयोग करें.
  • रोपण के समय पौधों के मध्य पर्याप्त स्थान छोड़ें.
  • शिकारी कीटों की जनसंख्या को प्रभावित न होने देने के लिए व्पापक प्रसार वाले कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग न करने का ध्यान रखें.
  • सिलिड के लिए प्रतिकूल परिस्थितियों का निर्माण करने के लिए पत्तियों में हवा के पर्याप्त संचालन के साथ-साथ सूर्य का अच्छा प्रकाश पाना सुनिश्चित करें.
  • मौसम के दौरान अत्यधिक उर्वरकों का प्रयोग करने से बचें.
  • सूखे के प्रभाव से बचने के लिए बागान में नियमित पानी दें.
  • फसल कटने के बाद बागानों से पुरानी टहनियों और अवशेषों को साफ़ कर दें।.

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