- सिट्रस (नींबू वंश)

सिट्रस (नींबू वंश) सिट्रस (नींबू वंश)

भूरे, मुलायम शल्क

कीट

Coccus hesperidum


संक्षेप में

  • भूरे मुलायम शल्क तनों, पत्तियों, हरी टहनियों और कभी-कभी फलों को खाते हैं.
  • खाये जाने के कारण होने वाला नुकसान पत्तियों के पीलेपन और गम्भीर मामलों में, पर्णपात के रूप में दिखता है.
  • राख जैसी फफूँदी के कारण हुआ अप्रत्यक्ष नुकसान शल्कों के द्वारा होने वाले प्रत्यक्ष नुकसान से कहीं बड़ा होता है।.
 - सिट्रस (नींबू वंश)

सिट्रस (नींबू वंश) सिट्रस (नींबू वंश)

लक्षण

लक्षण आक्रमण की तीव्रता और साइट्रस की प्रजाति से संबंधित होते हैं (नींबू और चकोतरा विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं)। शल्क तनों, पत्तियों, हरी टहनियों और कभी-कभी फलों, आम तौर पर भूमि स्तर के, को खाते हैं। प्रत्यक्ष नुकसान प्रायः दिखाई नहीं देता है जब तक कि उनकी एक बड़ी जनसंख्या न हो जाये। भक्षण से होने वाला नुकसान पत्तियों के पीलेपन के रूप में और गंभीर मामलों में पर्णपात के रूप में दिखाई देता है। शल्कों द्वारा उत्पादित मधुरस के कारण राख जैसी फफूँदी का संक्रमण हो सकता है, जो पत्तियों और फलों को काला कर देती है। असलियत में, शल्कों की अपेक्षा यह अधिक नुकसान का कारण होता है। कमज़ोर पेड़ों पर फलों के अच्छे गुच्छे नहीं होते हैं और जब वे बढ़ कर पकते हैं, उनका आकार छोटा रह जाता है। हालांकि सी. हेस्पेरिडम शायद ही अपने मेज़बान को मारता है, साइट्रस के नए पेड़ों का विकास और भविष्य की उत्पादकता प्रभावित होती है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

लक्षण, भूरे मुलायम शल्क, कॉकस हेस्पेरिडम, के खाये जाने से होते हैं। यह साइट्रस का एक आम कीट है, जो मुख्य रूप से ऊष्ण कटिबंधीय और उप-ऊष्णकटिबंधीय के साथ-साथ ग्रीनहाउस में भी पाया जाता है। मौसम में इसका चरम गर्मियों के मध्य से लेकर शीत के आरंभ तक रहता है। नर चलायमान होते हैं और दो पंखों वाले कीट या मक्खी जैसे होते हैं, लेकिन बहुत कम दिखाई देते हैं। मादाएं अंडाकार, चपटी और मुलायम होती हैं और पत्तियों की निचली ओर चिपकी होती हैं। जैसे-जैसे ये विकसित होते हैं, इनका रंग हरे से बदल कर भूरा हो जाता है। ये एक प्रकार के अंडों के थैले में अंडे देती हैं। वहाँ से, बहुत सूक्ष्म रेंगने वाले जीव जल्द ही टहनियों, पत्तियों की मध्यशिरा के साथ या फलों पर अपने खाने के लिए उपयुक्त स्थान खोज लेते हैं। हवा भी इन्हें समीप के पेड़ों पर ले जाती है और कीट का प्रसार होता है।

जैविक नियंत्रण

प्राकृतिक शत्रुओं में परजीवी कीट मेटाफ़ाइकस ल्युटियोलस, माइक्रोटेरिस निटनेरी, मेटाफ़ाइकस हेल्वोलस, एन्कायर्टस प्रजाति, एनकार्सिया सिट्रीना और चींटियों के प्रति सहनशील कोकोफ़ेगस प्रजाति शामिल हैं। सबसे आम शिकारी परजीवी मक्खियाँ, लेसविंग (क्रिसोपा, क्रिसोपर्ला) और स्कुटेलिस्टा सायनिया के साथ लेडीबर्ड झींगुर राइज़ोबियस लोफ़न्थे हैं। एंटोमोपैथोजेनिक कवक (वर्टिसिलियम लेकानी) और गोल कृमि स्टिनरनेमा फ़ेल्टे अपेक्षाकृत उच्च नमी की परिस्थितियों में विशेष रूप से प्रभावी होते हैं। जैविक छिड़कावों में पौधौं के तेल/सत (उदाहरण के लिए पायरेथ्रम या फ़ैटी अम्ल) शामिल हैं।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा निरोधात्मक उपायों के साथ जैविक नियंत्रण कारकों, यदि उपलब्ध हों, का समावेश कर समन्वित दृष्टिकोण अपनाने पर विचार करना चाहिए। भूरे मुलायम शल्कों को नियंत्रित करना आश्चर्यजनक रूप से कठिन होता है। क्लोरपायरिफ़ॉस, कार्बारिल, डाईमेथोटेट या मैलथियोन वाले उत्पाद इस कीट के विरुद्ध अच्छी तरह काम करते हैं। इन उपचारों के पूरक रूप में संकरे तेल श्रेणी के छिड़कावों का प्रयोग किया जा सकता है। राख जैसी फफूँदी को जड़ जमाने से रोकने के लिए कवकनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है। किसी भी हाल में, व्यापक प्रसार वाले कीटनाशकों के उपयोग से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे लाभप्रद कीटों को बाधा पहुँचती है। ।

निवारक उपाय

  • ग्रीनहाउस या खेतों में ले जाने से पहले रोपण की सभी सामग्रियों का शल्क के लिए निरीक्षण करने का ध्यान रखें.
  • अपने बागान की शल्क के चिन्हों के लिए नियमित रूप से निगरानी रखें और कम संख्या में होने पर खुरच कर हटा दें.
  • अत्यधिक संक्रमित पत्तियों और टहनियों को हटा दें तथा जला दें.
  • छतरी में हवा के आवागमन को बढ़ाने के लिए पेड़ों की पर्याप्त छँटाई करें, जिससे शल्कों के लिए परिस्थितियां प्रतिकूल बनें.
  • तनों के चारों ओर बाधाएं या जाल लगाएं जिससे शल्क के पीछे आने वाली चींटियों के लिए बाधा उतपन्न की जा सके.
  • व्यापक असर वाले कीटनाशकों का उपयोग न करें जो लाभप्रद कीटों को प्रभावित कर सकते हैं।.

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