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लाल कद्दू गुबरैला

कीट

Aulacophora foveicollis


संक्षेप में

  • खाए जाने से पत्तियों पर बने बड़े-बड़े छेद.
  • जड़ों और भूमिगत तनों पर गहरे छेद.
  • जड़ों और तनों की सड़न और गलन.
  • लाल अंडाकार भृंग की मौजूदगी।.
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लक्षण

वयस्क कीट पत्तियों, फूलों और फलों पर खूब भक्षण करते हैं। गुबरैला पौधे के ऊतकों (शिराओं के बीच) में बड़े छेद बनाता है। इससे वृद्धि धीमी पड़ जाती है और अंततः पौधे की मृत्यु हो जाती है। नवांकुरों को पहुंचा नुकसान अक्सर विनाशकारी होता है क्योंकि इसके कारण फसल देर में तैयार होती है। फूल प्रभावित होने पर फल अपने आप कम हो जाते हैं। इस कीट के कीटडिंभ मिट्टी में रहते हैं और पौधों की जड़ों और भूमिगत तनों को खाते हैं। इसके कारण जड़ें सड़ और गल जाती हैं। नवांकुरों पर भक्षण करने वाले वयस्क विकास धीमा कर सकते हैं। इस कारण पौधे की मृत्यु तक हो सकती है। इससे खेत में खाली स्थान दिखने लगते हैं। कभी-कभी गुबरैले मिलकर पुराने पौधों की पत्तियां कुतरते हैं। फूलों के हिस्सों को भी कुछ नुकसान पहुंच सकता है, जिससे कम फल लगते हैं। नए फलों के निचले भागों पर वयस्क के भक्षण के कारण निशान दिखते हैं और इस कारण सड़न पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवियों को हमला करने का मौका मिल जाता है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

क्षति औलाकोफ़ोरा फ़ोवेकोलिस के कीटडिंभ के साथ-साथ वयस्क गुबरैले के कारण होती है, जो पत्तियों, फूलों और फलों को खाते हैं। पूर्ण विकसित लार्वा आमतौर पर मलाई जैसे सफ़ेद और इंसान की अंगुली के नाखून के आकार के होते हैं। अंडे आमतौर पर अंडाकार, पीले होते हैं और पौधे के आधार के पास एक अंगुली की गहराई पर नम मिट्टी में एक-एक करके या 10 के समूह में दिए जाते हैं। वयस्क नारंगी-लाल और आकार में घरेलू मक्खी जितने होते हैं। लार्वा एक या दो सप्ताह बाद निकलते हैं और प्यूपीकरण के लिए मिट्टी में जाने से पहले पौधे और उसकी जड़ों पर हमला करते हैं। प्यूपीकरण 7 से 17 दिन तक एक मिट्टी के बने ककून में होता है। 27-28 डिग्री सेल्सियस तापमान प्यूपीकरण के लिए आदर्श है।

जैविक नियंत्रण

गुबरैले के प्राकृतिक दुश्मन उस पर हमला करते हैं, इनमें टैकिनिड और रेडुविड राइनोकोरिस फ़्यूसिपेस परिवार के सदस्य शामिल हैं। 4 लीटर पानी में आधा कप लकड़ी की राख और आधा कप नींबू मिलाएं और कुछ घंटों के लिए यूं ही छोड़ दें। इस मिश्रण को छान लें और अपने खेत में डालने से पहले कुछ प्रभावित पौधों पर आज़मा कर देख लें। मिश्रण को पत्तियों पर छिड़काव के रूप में इस्तेमाल करें। वैकल्पिक रूप से, आप पौधों पर आधारित उत्पादों, जैसे कि नीम (NSKE 5%), डेरिस या पाइरेथ्रम (इसमें साबुन मिलाएं), को 7-दिन के अंतराल पर इस्तेमाल कर सकते हैं। बीज और पौधशाला उपचार के लिए ट्रिकिडर्मा ट्राईकोडर्मा और बीज, पौधशाला उपचार और मिट्टी में डालने के लिए सीडोमोनास फ़्लोरेसेंस डालें। वयस्क गुबरैले को आकर्षित करने और उन्हें मारने के लिए तेज़ कीटनाशक से उपचारित जाल फसलों का इस्तेमाल करें।

रासायनिक नियंत्रण

रोकथाम उपायों के साथ-साथ उपलब्ध जैविक उपचारों को लेकर हमेशा एक समेकित कार्यविधि पर विचार करें। डेल्टामेथ्रिन को 250 मिलीलीटर प्रति एकड़ के दर से उपयोग तब किया जा सकता है जब नर्सरी में प्रति 10 पौधों पर 1 वयस्क दिखाई देता है। सिंथेटिक पाइरेथ्रॉयड प्रभावी हो सकते हैं, लेकिन ये कीट के प्राकृतिक दुश्मनों के लिए हानिकारक होते हैं। तेज़ कीटनाशक छिड़काव के साथ कीट को आकर्षित करने वाली जाल फसलों के उपयोग से वयस्क गुबरैले को मारा जा सकता है। जैसे ही कीट की मौजूदगी का पता चले, वैसे ही फ़ेनिट्रोथियॉन का छिड़काव करें और 15 दिनों के अंतराल पर यह प्रक्रिया दोहराएं।

निवारक उपाय

  • तेज़ी से वृद्धि करने वाली किस्में उगाएं और साथ में कीट को आकर्षित करने वाली फ़सलें (ट्रैप क्रॉप) लगाएं.
  • पहले से संक्रमित फसलों के पास नई फसल लगाने से बचें.
  • बहुत ज़्यादा प्रकोपित पौधों की भरपाई करने या उनकी जगह लेने के लिए अतिरिक्त बीज डालें.
  • गुबरैला के हमले से बचाने के लिए नवांकुरों को पॉलीथिन बैग से ढक दें.
  • स्वस्थ पौधा वृद्धि के लिए अच्छी परिस्थितियां, जैसे कि पर्याप्त पोषक तत्व, खाद, कूंडों से सिंचाई सुनिश्चित करें.
  • भक्षण से हुई क्षति के लिए सप्ताह में एक बार खेतों की निगरानी करें और पीले चिपचिपे जालों (येलो स्टिकी ट्रैप) का इस्तेमाल करें.
  • अपने खेत को वैकल्पिक मेज़बान खरपतवार से मुक्त रखें.
  • कूड़ा-कर्कट को एकत्र करके जला या दबा दें.
  • तड़के गुबरैले को उस समय हाथों से उठाकर हटा दें जब वे बहुत सुस्त होते हैं.
  • गर्मियों के दौरान गहरी जुताई करके कीट को शीत-शयन अवस्था से बाहर निकालें.
  • प्राकृतिक शिकारियों और कीट के परजीवियों का संरक्षण करें।.

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