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अनार अनार

अनार फल छिद्रक (फ्रूट बोरर)

कीट

Deudorix Isocrates


संक्षेप में

  • आरंभिक चरण में फल स्वस्थ दिखता है.
  • बाद के चरणों में फल सड़ कर गिर जाता है.
  • नीलापन लिए हुए कत्थई तितली.
  • पूर्ण रूप से विकसित लार्वा छोटे बालों और सफ़ेद धब्बों के साथ गहरे कत्थई रंग का होता है।.
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लक्षण

लक्षण अधिकांशतः संक्रमण के बाद के चरणों में दिखाई देते हैं। फूलों की कलियाँ तथा फल मुख्य रूप से प्रभावित होते हैं। फल आरम्भ में स्वस्थ नज़र आते हैं क्योंकि प्रवेश के छिद्र फल के रस से भर जाते हैं। जब रोग बढ़ता है, तो लार्वा के छिद्र दिखाई देने लगते हैं क्योंकि ये लार्वा के पिछले खंड से बने होते हैं। पूर्ण रूप से विकसित लार्वा फल के कड़े छिलके में छिद्र कर बाहर निकलता है और जाल बुनता है जो फल या डंठल को मुख्य शाखा से बाँध देता है। प्रभावित फल बाद में कवक तथा जीवाणुओं के आक्रमण का सामना करते हैं जिसके कारण उनमें सड़न आती है तथा अंत में ये गिर जाते हैं। फल से इल्लियों के मलमूत्र के कारण अप्रिय दुर्गन्ध आती है। मलमूत्र प्रवेश बिन्दुओं से बाहर आता है और अंततः सूख जाता है, जिससे फल मनुष्यों के उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं रह जाता है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

अनार में नुकसान ड्यूडोरिक्स आइसोक्रेट्स के लार्वा के कारण होता है, जिसे आमतौर पर अनार तितली या अनार फल छिद्रक के रूप में जाना जाता है। यह अनार के फल का सबसे विनाशकारी कीट है। तितलियां दिन के समय सक्रिय रहती हैं और फलों, कोमल पत्तियों, फूलों की कलियों और डंठलों पर एक-एक अंडे देती हैं। एक मादा नियंत्रित परिस्थितियों में औसतन 6.35 अंडों के साथ 20.5 अंडे देती हैं। डी. आइसोक्रेट्स को अंडे देने से लेकर वयस्क होने तक एक जीवन चक्र को पूरा करने में लगभग 33-39 दिन लगते हैं। अंडे फूटने के बाद, लार्वा विकसित हो रहे फलों में छेद करके भीतर प्रवेश करते हैं, और गुदे, विकासशील बीजों एवं ऊतकों पर भोजन करते हैं। भोजन के कारण क्षति की सबसे ज़्यादा संभावना 30 से 50 दिनों की आयु के बीच होती है। अनार तितली का आगमन जुलाई के दौरान सबसे ज़्यादा गंभीर होता है और यह सापेक्ष आर्द्रता के साथ अत्यंत बढ़ जाता है। आगमन मार्च में कम होता है और सितंबर में अपने चरम में पहुंचने तक लगातार बढ़ता रहता है।

जैविक नियंत्रण

परजीवी ट्राइकोग्रामा की प्रजाति कीटों को नियंत्रित करने में कारगर है। उन्हें 10 दिनों के अंतराल पर 1.0 लाख प्रति एकड़ की दर से चार बार छोड़ें। उन्हें खेत के मध्य एवं किनारों पर रखा जा सकता है। डी. आइसोक्रेट्स के शिकारी हैं लेसविंग, सोनपंखी कीट, मकड़ी, लाल चींटी, व्याध-पतंग, रॉबर फ़्लाई, रेडुविड कीट एवं बद्धस्त कीट। इसके अलावा, ततैया की प्रजातियां, बड़ी आंखों वाला कीट (जियोकोरिस प्रजाति), कनखजूरा, स्थल भृंग, पेंटाटोमिड कीट (ओकेन्थेकोना फ़र्सेलाटा) फल छिद्रक कीटों के खिलाफ़ कथित रूप से प्रभावी हैं। पक्षियों की प्रजातियां भी इल्ली पर पोषण करेंगी। परागण के तुरंत बाद बाहरी पत्तेदार ढपनी को काट देना चाहिए क्योंकि फल छिद्रक पत्तेदार ढपनी पर अंडे देते हैं। इसके बाद पुष्पण चरण के दौरान नीम के तेल (3%) का इस्तेमाल करना चाहिए। कीड़े से बचाने के लिए फल के आधार के चारों ओर साफ़ कीचड़ (जो सूर्य द्वारा तप्त हो) स्थापित करें।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा जैविक उपचारों के साथ निवारक उपायों के एकीकृत दृष्टिकोण पर विचार करें। पुष्पण चरण के दौरान, फल छिद्रक की उपस्थिति होने पर, 3 मिली एज़ाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम को 1 लीटर पानी में घोलकर, पुष्पण के शुरू होने से लेकर कटाई होने तक 15 दिनों के अंतराल पर छिड़कें। पुष्पण से लेकर फलों के विकास तक एक अर्धमासिक अंतराल पर निम्नलिखित रसायनों में से किसी एक का छिड़काव करें: डाइमेथोएट (2 मिली/लीटर), इंडोक्साकार्ब (1 ग्राम/लीटर), साइपरमेथ्रिन (1.5 मिली/लीटर) या प्रोफ़ेनोफ़ॉस (2 मिली/लीटर)। अनार फल छिद्रक के प्रभावी नियंत्रण के लिए लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन का रासायनिक इस्तेमाल भी उचित रहता है। इमामेक्टिन 0.25 ग्राम बेंज़ोएट 5 एस.जी. को एक लीटर पानी में मिलाकर या 0.20 मिली स्पिनोसेड 45 एस.सी. को एक लीटर पानी में मिलाकर दो छिड़काव करन से फलों के नुकसान में सबसे ज़्यादा कमी आती है।

निवारक उपाय

  • अपने खेतों की नियमित रूप से सूखी शाखाओं के लिए निगरानी रखें.
  • वयस्क तितलियों की निगरानी के लिए 1 /एकड़ की दर से प्रकाश जाल को स्थापित करें.
  • क्षतिग्रस्त फलों को एकत्रित करें और उन्हें खेतों से दूर नष्ट कर दें.
  • परगन के तुरंत बाद फूलों के पुष्पकोश को क़तर देने से फलों पर अण्डों का बोझ तथा क्षति के स्तर को कम करने में सहायता मिलती है.
  • वैकल्पिक मेज़बान का कार्य करने वाले खरपतवार और पौधों को हटा दें.
  • कम उम्र से ही फलों को (जब वे लगभग 5 सेंमी. बड़े हो जाएँ) बटर पेपर, 300 गेज की मोटाई के मोटे कपड़े या मलमल के कपड़े के थैले में बांध दें ताकि छिद्रक को फल तक पहुंचने से रोका जा सके.
  • फसल कटने के फ़ौरन बाद अनार के पेड़ों के चारों ओर खुदाई या जुताई कर दें जिससे प्यूपा को शिकारी पक्षियों, अन्य प्राकृतिक शत्रुओं तथा सूर्य के समक्ष लाया जा सके।.

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