- गेहूं

गेहूं गेहूं

लौह की कमी

कमी

Iron Deficiency


संक्षेप में

  • पत्तियां, किनारे से शुरू करते हुए, पीली पड़ने लगती हैं.
  • पत्तियों की शिरायें हरी बनी रहती हैं.
  • आगे के चरणों में, पत्तियां भूरे धब्बों के साथ सफ़ेद-पीली हो जाती हैं.
  • अवरुद्ध विकास।.
 - गेहूं

गेहूं गेहूं

लक्षण

लौह की कमी सबसे पहले नई पत्तियों पर दिखाई देती है। ऊपरी पत्तियों का पीला पड़ना (क्लोरोसिस) जिसमें बीच का हिस्सा और पत्तियों की शिराएं स्पष्ट रूप से हरी रह जाती हैं (अंतःशिरा हरिमाहीनता), इसकी विशेषता है। बाद के चरणों में, यदि कोई उपाय नहीं किया जाता है, तो पूरी पत्ती सफ़ेद-पीली हो जाती है और पत्ती की सतह पर भूरे गले हुए धब्बे उभर आते हैं, जो बाद में अक्सर किनारों पर गले हुए हिस्सों के रूप में विकसित हो जाते हैं। प्रभावित क्षेत्रों को खेत में कुछ दूरी से आसानी से पहचाना जा सकता है। लौह की कमी वाले पौधों का विकास बाधित होता है तथा कम उपज की संभावना होती है।

मोबाइल फसल चिकित्सक की सहायता से अपनी उपज बढ़ाएं!

इसे अभी निशुल्क प्राप्त करें!

प्रभावित फसलें

ट्रिगर

बही हुई उष्णकटिबंधीय मिट्टी में या ऐसी मिट्टी में जिसकी जल निकासी अच्छी न हो, विशेषकर ठंडे और नम वसंत में, लौह की कमी एक गंभीर समस्या हो सकती है। ज्वार, भुट्टा, आलू, और फलियां सबसे गंभीर रूप से प्रभावित पौधों में से हैं, जबकि गेहूं और अल्फ़ा-अल्फ़ा सबसे कम संवेदनशील है।चूना पत्थर से ली गई कैल्शियम युक्त, क्षारीय मिट्टी (7.5 पीएच या उससे अधिक) विशेषकर लौह की कमी के प्रति संवेदनशील है। प्रकाश संश्लेषण के लिए और फलियों में जड़ों की गांठों के विकास के लिए लौह आवश्यक होता है। इसलिए, लौह की कमी गांठों के माप, नाइट्रोजन के स्थिरीकरण और फ़सल की उपज को गंभीर रूप से कम कर देती है। अनुमानित महत्वपूर्ण स्तर है पौधे के सूखे ऊतकों के प्रति किलो का 2.5 मिग्रा। लौह की कमी से पौधे में कैडमियम का अवशोषण और एकत्रीकरण भी बढ़ जाता है।

जैविक नियंत्रण

छोटे किसान बिछुआ का मैल तथा एल्गी के सत से बने पत्तियों के उर्वरक का प्रयोग करें। मवेशी खाद, वानस्पतिक खाद और कम्पोस्ट के उपयोग से मिट्टी में लौह की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। अपने पौधों के समीप सिंहपर्णी लगाएं, क्योंकि यह पास के पौधों, विशेषकर वृक्षों में, लौह उपलब्ध कराता है।

रासायनिक नियंत्रण

- लौह (Fe) युक्त उर्वरकों का प्रयोग करें। (उदाहरण: फ़ेरस सल्फ़ेट (Fe19%)। - अपनी मिट्टी और फ़सल के लिए सबसे अच्छे उत्पाद और खुराक जानने के लिए अपने कृषि सलाहकार से परामर्श करें। - अपने फसल उत्पादन को अधिकतम करने के लिए फ़सल के मौसम की शुरुआत से पहले मिट्टी परीक्षण करने की सलाह दी जाती है।

निवारक उपाय

  • ऐसी किस्में लगाएं जो लौह न्यूनता के प्रति कम संवेदनशील हों.
  • बोए हुए पौधों के साथ सिंहपर्णी लगाएं.
  • ऐसे उर्वरकों का उपयोग करें जिनमें लौह उपस्थित हो.
  • अगर संभव हो, तो संवेदनशील फ़सलों को कैल्शियम युक्त, क्षारीय मिट्टी में न बोएं.
  • मिट्टी की जल निकासी को बेहतर करें और आवश्यकता से अधिक पानी न दें.
  • चूने के उपयोग से बचें क्योंकि इससे मिट्टी का पीएच स्तर बढ़ जाएगा।.

मोबाइल फसल चिकित्सक की सहायता से अपनी उपज बढ़ाएं!

इसे अभी निशुल्क प्राप्त करें!