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कसावा का हरा स्पाइडर घुन

घुन

Mononychellus tanajoa


संक्षेप में

  • पत्ती की लेमिना पर पीले से रंग के धब्बे बिखरे रहते हैं, जो उसे धब्बेदार स्वरूप प्रदान करते हैं.
  • क्लोरोसिस (हरितहीनता) एक कोशिका से पूरी पत्ती में बढ़ता जाता है.
  • अंतिम शाखा का झड़ना परिणामस्वरूप शाखा के किनारों का स्वरूप "मोमबत्ती" की तरह हो जाता है।.
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लक्षण

यह घुन ताज़ा पत्तियों के निचले भाग से अपना भोजन करते हैं, जो कि कसावा की हरी टहनी तथा सहायक कली पर होते हैं। ये अपना छेदक तथा चूसने वाला मुखभाग एकल कोशिकाओं के अंदर डालते हैं, और वहाँ से सारा सामान निकाल लेते हैं, यहाँ तक कि हरा क्लोरोफिल भी। पत्तियों पर यह खाद्य प्रक्रिया, लेमिना पर बहुत छोटे, पीले से हरितहीन धब्बे के रूप में दिखाई देती है। अत्यधिक संक्रमण पत्तियों को चित्तीदार बना देता है, जिससे वृद्धि अवरुद्ध होती है, जो बाद में पौधे के झड़ने तथा मरने का कारण बनती है। अंतिम शाखा पर हमले के कारण 'मोमबत्ती' का स्वरूप एक लक्षण है, जो बाद में शाखा के किनारों को झाड़ देता है तथा परिगलित बना देता है। 2-9 माह तक के कसावा के पौधे संक्रमण के लिए अत्यधिक संवेदनशील होते है। घुन के गम्भीर रूप से आक्रमण से कन्द के खेत में 20 से 80% तक नुकसान हो जाता है। इसके अलावा, कसावा के तने की गुणवत्ता भी कम हो जाती है, जो अक्सर फसल को बनाये रखने के लिए रोपण सामग्री की कमी का कारण बनता है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

मोनोनायचेलस टेनाओआ तथा मोनोनायचीलस प्रोग्रेसिवस हरे स्पाइडर घुन की खाद्य प्रक्रिया के कारण लक्षण दिखाई देते हैं। यह अपना छेदक तथा चूसने वाला मुखभाग पत्तियों के निचली ओर की एकल कोशिकाओं के अंदर डालते हैं, और वहाँ से कोशिका का सारा सामान निकाल लेते हैं। यह कसावा के पौधे के छोटे कीट कहलाते हैं, परन्तु अनुकूल परिस्थितियों में, उदाहरण के लिए सूखे के मौसम में यह अत्यधिक नुकसान पहुँचा देते हैं। घुन एक पौधे से दूसरे पौधों में सक्रिय रूप से घूमता है, लेकिन हवा व जल के छिड़काव के द्वारा भी फैल सकता है। वे कटाई के 60 दिनों तक जीवित रह सकते हैं, इसलिए घुन का मुख्य वाहक खुद किसान होता है, जो खेत या मैदान में संक्रमित सामानों को ले जाता है। युवा घुन हरे रंग के होते हैं, तथा वयस्क बनते ही पीले रंग में बदल जाते हैं। यह अपने अस्पष्ट शरीर के हिस्सों के द्वारा पहचाने जाते हैं जो इन्हें एक इकाई शरीर का स्वरूप प्रदान करता है। ये पंखहीन, संयुक्त आंखों और एंटेना वाले होते हैं। वयस्क मादाएँ नर से बड़ी होती हैं और 0.8 मिमी लंबी हो सकती हैं।

जैविक नियंत्रण

बहुत सारी परभक्षी प्रजातियाँ पाई गई हैं जो घुनों की जनसँख्या को प्रभावी रूप से कम करती हैं। एम्बलीसिस लिमोनीकस तथा ए. इड्यूस के उपयोग से 50% तक हरे स्पाइडर घुनों को कम किया जा सकता हैं। परभक्षी कीट टायफ़्लोड्रोमेलस एरिपो तथा टी. मेनिहोटी अफ्रीका के कई देशों में स्थापित कर दिए गए हैं, यह सफलतापूर्वक कसावा के हरे स्पाइडर घुनों को पकड़ रहे हैं। नियोज़ीगाइट्स प्रजाति की परभक्षी कवक भी कई देशों में अच्छे परिणाम दे रहे हैं, यह कसावा के हरे स्पाइडर घुनों की मृत्यु का कारण बन रहे हैं। नीम के तेल का छिड़काव भी काफी हद तक सन्तोषजनक परिणाम देता है।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो जैविक उपचार के साथ बचाव के उपाय भी साथ में करें। मोनोनायचीलस टेनाओआ के रासायनिक उपचार की सलाह नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे प्रतिरोध क्षमता का विकास होता है और द्वितीयक रोग भी हो जाते है। केवल अकारिसाइड अबमेक्टिन इस कीट की रोकथाम के लिए उपयोगी पाया गया है।

निवारक उपाय

  • उन किस्मों का प्रयोग करें जो घुन के प्रति अच्छी सहनशील हों.
  • रोपाई के लिए सिर्फ प्रमाणित कलमों का ही प्रयोग करें.
  • पौधे बरसात के शुरू के मौसम में जल्दी ही उगा लेने चाहिए, जिससे उनमें सूखे मौसम को झेलने के लिए उचित प्रतिरोधी क्षमता पाई जा सके.
  • अरहर से अन्तरकृषि करें, यदि सम्भव हो तो दो या तीन कतारों में, तथा पौधे तिरछे न लगाएँ.
  • घुन के लक्षण और आवास को देखने के लिए मेनियोक खेत की रोज़ाना देखभाल करें.
  • रोगग्रस्त सामानों को बाज़ार तथा खेतों में ले जाना बंद करें, यह इसके फैलने का प्रमुख कारण है।.

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