- धान

धान धान

धान की बाली का घुन (पैनिकल माइट)

घुन

Steneotarsonemus spinki


संक्षेप में

  • पत्ती आच्छदों के अंदर की तरफ खाते हुए घुनों की मौजूदगी, जिससे रंग बदरंग हो जाता है.
  • बाली खाए जाने से बंध्यता, टेढ़े-मेढ़े दानें, ऋतुमंजरी रोग (स्ट्रेट हेड)।.
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लक्षण

पत्ती का भक्षण आवरण के पीछे होता है और वहां मौजूद दालचीनी के रंग से चॉकलेटी भूरे धब्बों द्वारा इसकी पहचान की जा सकती है। बाहरी आवरण हटाकर घुनों को अक्सर सीधे देखा जा सकता है। घुन विकसित हो रही बालियों को भी खाते हैं, शीर्ष की बूट अवस्था से लेकर मिल्क स्टेज तक। क्षति के कारण मौकापरस्त फफूंद रोगाणु, विकसित हो रहे दानों और पत्ती आवरण (जैसे कि आवरण विगलन का संचार करने वाले) में प्रवेश कर जाते हैं जिसके कारण रोग (उदाहरण के लिए- आवरण की सड़न) होता है। इससे बालियां क्षतिग्रस्त, पौधे बांध्य, ऋतुमंजरी रोग और पैरट-बीकिंग कहलाने वाली दानों की विकृति हो जाती है। यह दुनिया भर में धान की फ़सल पर हमला करने वाला सबसे महत्वपूर्ण और विनाशकारी घुन कीट है।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

लक्षणों का कारण धान की बालियों का घुन स्टेनियोटार्सोनेमस स्पिंकी द्वारा किया गया भक्षण होता है। उच्च तापमान और कम वर्षा खेत में बड़ी आबादी के विकास के लिए आदर्श हैं। 25.5° सेल्सियस और 27.5° सेल्सियस के बीच तापमान और 80 और 90% के बीच नमी सर्वोत्तम परिस्थितियां हैं। लगातार धान की पैदावार करना और खेतों में उपकरणों को साझा करना भी आबादी बढ़ाने में मददगार है। धान के पौधों पर वर्ष भर में कभी भी प्रकोप हो सकता है। हालांकि आबादी बूटिंग स्टेज पर चरम पर होती है और पौधे के परिपक्व होते-होते घट जाती है। विशिष्ट लक्षणों को बता पाना मुश्किल होता है क्योंकि घुन आम तौर पर धान के अन्य कीटों जैसे सैरोक्लैडियम ओराइज़ी (आच्छद विगलन) और बर्खोल्डेरिया ग्लूमी (जीवाणु बाली झुलसा) के साथ-साथ मौजूद रहता है।

जैविक नियंत्रण

कीटनाशकों के बेतहाशा इस्तेमाल से धान के खेत में एस. स्पिंकी के कुदरती दुश्मनों (जैसे मकड़ियां, कीट-परजीवी ततैया, आदि) को न मारें।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो तो हमेशा एक समन्वित दृष्टिकोण से रोकथाम उपायों के साथ उपलब्ध जैविक उपचारों का इस्तेमाल करें। भयंकर प्रकोप होने पर हेक्सीथायजॉक्स अथवा सल्फर यौगिक युक्त कीटनाशको का छिडकाव करें। छिड़काव से पहले खेत को पानी से लबालब भर दें ताकि घुन पौधे के ऊपर चढ़ जाएं जिससे उपचार का प्रभाव बढ़ जाता है।

निवारक उपाय

  • घुन के लक्षणों के लिए खेत की नियमित निगरानी करें.
  • फ़सल कटाई के बाद खेत जोतने से पहले जलाने के लिए भूसा फैला दें.
  • फ़सल काटने के बाद दो सप्ताह तक खेत को खाली छोड़ दें.
  • पंक्तियों में घना पौधरोपण करें.
  • संतुलित एनपीके अनुपात के साथ उपजाऊ मिट्टी का इस्तेमाल करें.
  • खेत मे तथा उसके आसपास कहर-पतवार नियंत्रण में रखना सुनिश्चित करें.
  • घुन के जीवन चक्र को तोड़ने के लिए धान का फलियों या दालों वाली फ़सल से चक्रीकरण करें.
  • धान की खेती में इस्तेमाल किए जा रहे सभी औज़ारों को अच्छी तरह साफ़-सुथरा रखें।.

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