- सिट्रस (नींबू वंश)

सिट्रस (नींबू वंश) सिट्रस (नींबू वंश)

साइट्रस पर हवा से क्षति

अन्य

Wind Damage on Citrus


संक्षेप में

  • लंबे समय मे, हवा के कारण पेड़ों के विकास, शरीर रचना और आकृति में विभिन्न बदलाव आते हैं.
  • बाहरी क्षति में शाखाओं और टहनियों का टूटना, फलों का खुरदुरा होना तथा रेतमार शामिल हैं, जिसके कारण ऊतकों में घिसाव होता है और वे निकल जाते हैं.
  • गंभीर मामलों में, कम फलों का उत्पादन होता है, गुणवत्ता प्रभावित होती है, और उपज में हानि की संभावना रहती है।.
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लक्षण

लक्षणों को प्रायः तैला की क्षति जैसा समझा जाता है। छोटे पेड़ों की ऊपरी जड़ें और भूमि के स्तर की छाल पर बालू के कणों के कारण रगड़ के चिन्ह (सैंडब्लास्टिंग) दिखाई देते हैं। पत्तियों और तनों पर भी रगड़ के कारण घाव होते हैं, किंतु वहां पर नुकसान अधिक गंभीर होता है। हवा के दवाब के कारण विकास की दर और उपज कम हो सकती है, और हवा के समक्ष वाले हिस्से में कम या कोई भी फल नहीं दिखाई दे सकते हैं। बाद के मौसम में, छोटे फल (व्यास में 8 मिमी) हवा से क्षति के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। छिलके पर एक या अनेक आड़े या तिरछे भूरे निशान दिखाई देते हैं। तैला के कारण हुई क्षति की तुलना में, हवा से हुई क्षति की विशेषता फलों पर साफ़ ऊतकों के छोटे हिस्सों का दिखाई देना है, जबकि तैला या थ्रिप्स में निरंतर निशान दिखाई देते हैं। तेज़ हवाएं शाखाएं तोड़ या मोड़ देती हैं या पेड़ों को उखाड़ देती हैं।

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प्रभावित फसलें

ट्रिगर

लक्षण हवा के कारण होते हैं और बिना हवा के अवरोधकों वाले असुरक्षित इलाकों में विशेष चिंता का विषय हैं। यदि हवा लगातार तथा/अथवा तेज़ हो, तो साइट्रस की फ़सल का एक बड़ा प्रतिशत गुणवत्ता की दृष्टि से ख़राब हो सकता है या ठुकराया जा सकता है। छोटे फलों पर पुरानी पत्तियों के सतह पर रगड़ने से चिन्ह बन जाते हैं। बदरंग होने का कारण एक सुरक्षात्मक, खुरदरी सतह का बनना है। एक बार जब फल आकार में 3 सेंटीमीटर का हो जाता है और उसका छिलका सख़्त हो जाता है, तब क्षति मुख्यतः सूखी टहनियों और शाखाओं के रगड़ने के कारण होती है। ऊतकों में क्षति जीवाणुओं और कवकों के लिए ऊतकों में प्रवेश करने और बसने और अधिक क्षति पहुंचाने का अवसर होती है। विशेषकर, सूखी हवाएं पत्तियों के झड़ने, वायु दाह तथा झुलसन के द्वारा पेड़ों को क्षति पहुंचाती हैं, जिससे पत्तियाँ मर जाती है और फलों पर निशान पड़ जाते हैं।

जैविक नियंत्रण

पहले क्षति का अनुमान लगाएं। इसके विस्तार तथा विकास के चरण के अनुसार निर्धारित करें कि क्या पेड़ों को बचाया जा सकता है या नहीं। क्षतिग्रस्त शाखाओं और फलों को काटने या छँटाई के औज़ारों की मदद से हटा दें। जहाँ जीवाणु सम्बन्धी या कवकीय रोग चिंता का विषय हैं, वहाँ, विशेषतः नम मौसम में, जैविक लेपों का प्रयोग करें।

रासायनिक नियंत्रण

हमेशा निरोधात्मक उपायों के साथ जैविक उपचारों, यदि उपलब्ध हों, का समावेश कर समन्वित दृष्टिकोण अपनाने पर विचार करें। उपचार विकास के चरण तथा क्षति की तीव्रता पर निर्भर करता है। गंभीर मामले में, कवकीय तथा जीवाणु के कारण होने वाले रोगों से बचाव पर उपचार का ध्यान होना चाहिए, उदाहरण के लिए, क्षतिग्रस्त शाखाओं को काट कर साफ़ करना और कवकरोधी और जीवाणुनाशक लेपों का प्रयोग करना।

निवारक उपाय

  • हवा की गति, दिशा और आवृत्ति के आधार पर स्थायी या कुछ अवसरों के लिए हवा के अवरोधक स्थापित करें.
  • हवा के बहाव के अनुसार पेड़ों को लगाएं.
  • पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए अवरोधकों की मरम्मत तथा प्रबंधन का ध्यान रखें.
  • जब तेज़ हवा का पूर्वानुमान हो, तब मिट्टी में नमी की मात्रा अधिक रखें.
  • बड़े नुकसान के बाद नए विकास को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त नाइट्रोजन के प्रयोग पर विचार करें.
  • हवा के तेज़ झोंकों या विभिन्न दिशाओं से आने वाली हवाओं के लिए कई अवरोधकों को स्थापित करें.
  • मुख्य हवा की दिशा के अनुरूप चुनिंदा छँटाई की सलाह दी जाती है.
  • साथ ही, फसल कटने के बाद मृत लकड़ियों को चुन कर हटाना न भूलें जिससे कि आगामी मौसम में क्षति से बचा जा सके।.

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