पर्णजीवक (थ्रिप्स) - सेम

सेम

पर्णजीवक (थ्रिप्स)

Thysanoptera


संक्षेप में

  • छोटे चांदी जैसे धब्बे पत्ते के ऊपरी तरफ़ दिखाई देते हैं, जिसे 'सिल्वरिंग' के रूप में जाना जाता है.
  • 1-2 मिमी की लंबाई के पीले, काले और धारीदार कीड़े, जिनके कारण पत्तियों की निचली सतह पर काले मल के धब्बे दिखाई देते हैं.
  • इनके कारण पत्तियों, फूलों और फलों में विरूपण हो जाता है।.

लक्षण

लार्वा और वयस्क पौधे के ऊतकों को खाते हैं और छोटे चांदी जैसे धब्बे पत्ते की ऊपरी सतह पर छोड़ देते हैं, जिसे 'सिल्वरिंग' के रूप में जाना जाता है। ठीक यही प्रभाव फूलों की पंखुड़ियों पर भी होता है, ऐसा लगता है जैसे वहाँ का रंग निकाल दिया गया हो। पत्तियों की निचली सतह पर, थ्रिप्स और उनके लार्वा समूह में अपने काले मल के धब्बों पर मिलकर बैठते हैं। प्रभावित पौधों के पत्ते पीले, सूखे, विकृत या मुरझाए हुए दिखाई देते हैं। कली या फूलों के विकास के दौरान खाने के परिणामस्वरूप धब्बेदार, अविकसित या विकृत फूल या फल होते हैं और उपज का नुकसान होता है।

ट्रिगर

पर्णजीवक या थ्रिप्स 1-2 मिमी लंबे, पीले, काले या धारीदार कीड़े होते हैं। कुछ क़िस्मों के दो जोड़े पंख होते हैं, जबकि अन्य में कोई पंख नहीं होते हैं। वे पौधे के अवशेषों में या मिट्टी में या वैकल्पिक मेज़बान पौधों पर निष्क्रिय रहकर सर्दियां व्यतीत करते हैं। वे विषाणुजनक रोगों की एक विस्तृत श्रृंखला के रोगवाहक भी हैं। सूखे और गर्म मौसम में जनसंख्या मे वृद्धि होती है। आर्द्रता इसे कम कर देती है।

जैविक नियंत्रण

कुछ जैविक नियंत्रण उपायों को विशेष थ्रिप्स के लिए विकसित किया गया है। लार्वा या प्यूपा को खानेवाले शिकारी घुन व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं। जो प्रजातियां पत्तियों और फूलों पर आक्रमण करती हैं, उनके विरुद्ध नीम का तेल या प्राकृतिक पायरेथ्रिन का उपयोग करें, विशेषकर पत्तियों की निचली सतह पर। किसी भी अन्य रासायनिक या अन्य जैविक मिश्रणों की अपेक्षा थ्रिप्स के विरुद्ध स्पिनोसैड अधिक प्रभावशाली पाया गया है। इसका असर एक हफ़्ते या उससे अधिक तक रह सकता है और छिड़काव किए गए ऊतकों पर कुछ दूरी तक फैलता है। परंतु, यह कुछ प्राकृतिक शत्रुओं (जैसे, शिकारी घुन, साइरफ़िड मक्खी लार्वा) और मधुमक्खियों के लिए विषैला साबित हो सकता है। ऐसे पौधों में स्पिनोसैड न लगाएं जिनमें फूल निकल रहे हों। फूलों पर थ्रिप्स की उपस्थिति होने पर, कुछ शिकारी घुनों या हरे लेसविंग लार्वा का उपयोग किया जा सकता है। लहसुन के अर्क का कुछ कीटनाशकों के साथ संयोजन भी अच्छा काम करता है। परावर्तक यूवी पलवार (धातु की परत वाला पलवार) के इस्तेमाल की सिफ़ारिश दी जाती है।

रासायनिक नियंत्रण

यदि उपलब्ध हो, तो जैविक उपचार के साथ निवारक उपायों की एक एकीकृत पद्धति पर सदैव विचार करें। अपने उच्च प्रजनन दर और जीवन चक्र के कारण, थ्रिप्स ने कीटनाशकों के विभिन्न वर्गों के विरुद्ध प्रतिरोध विकसित कर लिया है। प्रभावशाली संपर्क कीटनाशकों में फ़िप्रोनिल (2 मिली), इमिडाक्लोप्रिड (0.25 मिली) या एसिटामिप्रिड (0.2 ग्राम) शामिल हैं, जिनके प्रभाव को बेहतर करने के लिए अक्सर उत्पादों में इन्हें पाइपरोनाइल बुटोक्साइड के साथ मिश्रित किया जाता है।

निवारक उपाय

  • पौधों की प्रतिरोधी किस्में, जिन्हें पर्णजीवक (थ्रिप्स) के लिए कीटनाशक उपयोग की आवश्यकता नहीं होती है, का इस्तेमाल करें.
  • थ्रिप्स को पैदा होने और बढ़ने से रोकने के लिए प्लास्टिक या जैविक पलवार का इस्तेमाल करें.
  • घासफूस वाले क्षेत्रों के बगल में संवेदनशील पौधों को न लगाएं.
  • ग्रीनहाउस से विषाणु और थ्रिप्स मुक्त छोटे पौधों का रोपण करें, जो थ्रिप्स का प्रबंधन करते हैं, और प्रतिरोपित पौधे पर निगरानी रखें.
  • रोग या कीट की उपस्थिति के बारे में जानने के लिए खेतों पर नियमित निगरानी रखें और उचित कदम उठाने के लिए गंभीरता का पता लगाएं.
  • इन्हें बड़े पैमाने पर पकड़ने के लिए बड़े क्षेत्र में चिपचिपे जाल का उपयोग करें.
  • अन्य धारक पौधों या विषाणुओं से संक्रमित पौधों के पास न लगाएं.
  • पौधे के अंत के हिस्सों की छंटाई की बजाय टहनियां निकलने के बिंदुओं और गांठों के बिल्कुल ऊपर से छंटाई करें.
  • दो रोपण के बीच ग्रीनहाउस को भाप से कीटाणुरहित किया जाना चाहिए.
  • संक्रमित पौधे और पौधे के मलबे को हटाएं और नष्ट कर दें.
  • पौधों की अच्छी सिंचाई करें और नाइट्रोजन उर्वरक के अत्यधिक उपयोग से बचें।.